सागरपाली रेलवे स्टेशन मान्यता रद्द करने के विरोध में स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन देते ग्रामीण।
- फोटो : BALLIA
बलिया। चित्तू पांडेय और जिले के मालवीय मुरली मनोहर के पैतृक गांव सागरपाली रेलवे स्टेशन की मान्यता रद किए जाने के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को संबोधित ज्ञापन बलिया स्टेशन अधीक्षक को सौंपा और चेताया कि इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन में बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा सागरपाली रेलवे स्टेशन जनपद की एक अमिट निशानी है। इस रेलवे स्टेशन परिसर में कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जमावड़ा होता था। स्टेशन से चंद दूरी पर स्थित शेरे-ए-बलिया चित्तू पांडेय का गांव रट्टू चक (वैना) है। स्टेशन से सटे ही बलिया के प्रथम सांसद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जिले के मालवीय मुरली मनोहर का पैतृक आवास है। अंग्रेजी फौज के खिलाफ जंग लड़ने के लिए इलाके के आंदोलनकारी सागरपाली से जिला मुख्यालय रेल द्वारा आते जाते थे। सागरपाली रेलवे स्टेशन पर 15 कर्मचारी तैनात थे, जिनमें तीन स्टेशन मास्टर, सात केबिन मैन, दो गेटमैन, दो प्वाइंट मैन और सफाई कर्मी है। इन्हें दूसरे स्टेशन पर शिफ्ट कर दिया गया है और सागरपाली रेलवे स्टेशन को हाल्ट बनाया जा रहा है, जो जनहित की भावना के प्रतिकूल है। बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त द्वारा मुरली मनोहर की जयंती 17 दिसंबर 2020 के दिन सागरपाली रेलवे स्टेशन का दर्जा बरकरार रखने की बात कही गई थी। बावजूद इसके रेलवे स्टेशन को हाल्ट बनाया जाना जिले की ऐतिहासिकता के साथ खिलवाड़ है। इसे कतई स्वीकार नहीं किया जाए और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता रंजय सिंह, विष्णुकांत चौधरी, दीना भाई, लक्ष्मण यादव, तेजबहादुर, राजकुमार मौर्या आदि शामिल रहे।