बांसडीह रोड। छोड़हर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं सांस्कृतिक-आध्यात्मिक महोत्सव के तीसरे दिन प्रसिद्ध कथा वाचिका जया किशोरी ने श्रद्धालुओं को जीवन में आत्मनिर्भरता, पारिवारिक सामंजस्य, आपसी सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि दूसरों पर निर्भर रहना ही दुख का सबसे बड़ा कारण है। हमारी जरूरतों और खुशियों की जिम्मेदारी स्वयं हमारी है। इसलिए अपनी खुशियों का रिमोट दूसरों के हाथ में नहीं देना चाहिए।
कथा का शुभारंभ जया किशोरी ने भजन ‘’’’सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए’ से किया। पारिवारिक जीवन में आपसी सहयोग और सामंजस्य की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि समाज में कुछ काम पुरुषों और कुछ महिलाओं के हिस्से में बांट दिए गए हैं, जबकि परिवार के सभी सदस्यों को हर तरह के काम की समझ होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि घर ऐसा होना चाहिए, जहां पहुंचकर व्यक्ति को सुकून मिले। यदि घर जाने के नाम पर ही किसी का मन खराब होने लगे तो यह सोचने वाली बात है। ऐसी स्थिति में एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय परिवार के सदस्यों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
कथा वाचिका ने डॉक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर मरीज को दवा दे सकता है लेकिन उसे खाना मरीज को ही पड़ता है। इसी तरह प्रेरक वक्ता और धर्मगुरु लोगों को सही रास्ता दिखा सकते हैं।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और अच्छे कर्म करते रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में यदि विष आया है तो शिव भी आएंगे। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में निराश होने के बजाय उनका सामना करना चाहिए।
कथा से पहले उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद भी किया और बच्चों को अपनी जिम्मेदारियां समझने की सीख दी।
आयोजक मंडल की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि उम्मीद से अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं और आयोजकों ने उनके बैठने व कथा सुनने की व्यवस्था के लिए सुबह से मेहनत की है। श्रोताओं की जिज्ञासाओं पर उन्होंने कहा कि उनकी अपेक्षा के अनुरूप कथा चौथे दिन सुनाई जाएगी।
बांसडीहरोड क्षेत्र के छोड़हर गांव में चल रहे श्रीमद्भावगत कथा के दौरान प्रवचन करती जया किशोरी।