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Ballia News: मेले के आयोजन के समय उठती है राजकीय दर्जा देने की मांग

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बलिया। ददरी मेला का आयोजन करीब आते ही इसे राजकीय दर्जा देने की मांग उठने लगती है। पूर्व में भी इस तरह के प्रयास हुए हैं, लेकिन वो परवान नहीं चढ़ पाए हैं। ये आरोप ध्रुवजी स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रताप सिंह बबलू ने सोमवार को लगाए हैं।
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प्रेस को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा है कि वर्ष 2020 में 6 अक्तूबर को राज्यपाल और मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को पत्र लिख कर ददरी मेले को राजकीय दर्जा देने की मांग की थी। इस पर शासन ने कहा था कि जब तक ददरी मेले के नाम से भूमि नहीं होगी तब तक राजकीय मेले का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।
इसके बाद तत्कालीन डीएम हरिप्रताप शाही ने ददरी मेले के लिए भूमि चिह्नित करने का आदेश तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार के साथ नपा के तत्कालीन ईओ दिनेश विश्वकर्मा को दिया था। भानू प्रताप सिंह ने बताया कि तब ईओ के पत्र के माध्यम से जानकारी मिली थी प्रशासन ने दो एकड़ भूमि की तलाश कर ली थी, लेकिन बाद में मामला ठंड़े बस्ते में चला गया।
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कहा कि प्रदेश में सात साल से भाजपा सरकार है। लेकिन मेले को राजकीय दर्जा नहीं मिल पाया। इसके पहले मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकार में भी ऐसा नहीं हो पाया। बसपा सरकार में भी ददरी मेले को राज्य स्तर का दर्जा नहीं मिल पाया।
जिलाधिकारी ने मेले को राजकीय दर्जा दिलाने का प्रयास शुरू किया है। इसके लिए मेले के आय-व्यय का ब्योरा तैयार कर जिलाधिकारी ने पत्र के साथ शासन को प्रेषित किया है। उम्मीद है सकारात्मक परिणाम मिलेगा। -सुभाष कुमार, ईओ, नगर पालिका।
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