बलिया। सर्दी और कोहरे के कारण रोडवेज बसों का सफर खतरनाक हो गया है। निगम से लेकर अनुबंधित बसों में इनसे बचाव के इंतजाम तक नहीं है। सरकारी तो सरकारी अनुबंधित बसों में भी न तो वाइपर हैं और न ही फॉग लाइटें लगीं हैं। उधर, निगम बसों में सर्द हवाएं रोकने के लिए खिड़कियों के शीशे तक टूटे हैं। ऐसे में रोडवेज बसों से सफर कर रहे मुसाफिरों की जान खतरे में है।
जिले में रोडवेज की करीब 81 बसों का संचालन किया जाता है। इन दिनों ठंड बढ़ने के साथ कोहरा भी छाने लगा है। कोहरे में दूर का दिखाना तक कम हो जाता है। भीषण घने कोहरे में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। कोहरे के कारण एक तो दूर तक का दिखाई नहीं देता, दूसरे शीशे पर कोहरा जमने से चालकों की मुसीबत और बढ़ जाती हैं। इससे दो से तीन मीटर तक ही नहीं दिखाई देता है। लेकिन बलिया डिपो से संचालित रोडवेज बसों की बात करें तो शीशे पर जमने वाले कोहरे को साफ करने के लिए वाइपर तक नहीं है। वहीं, फॉग लाइट न होने से कोहरे में बस चलाना चालकों के लिए आसान नहीं रहता है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण बिना फॉग लाइट के बसों दौड़ रही हैं। वहीं, कई बसों में खिड़कियों के शीशे तक टूटे हैं। इससे यात्री ठंड में कांपते हुए यात्रा कर रहे हैं।
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रास्ते में बस रोककर साफ करते हैं शीशा
नाम न छापने पर चालकों ने बताया कि सुबह के समय कोहरा ज्यादा रहता है, अंधेरा भी रहता है। मगर, न तो बसों में फॉग लाइट है और न ही वाइपर खिड़कियों के शीशे भी टूटे हैं। यात्री हम लोगों से कहते हैं। कई बार अधिकारियों को बताया, लेकिन कोई नहीं सुनता। चालकों का कहना है कि ऐसे में रास्ते में बस रोककर कोहरा साफ करना पड़ता है।
रोडवेज की अधिकांश बसों से फर्स्ट एड बॉक्स गायब
बलिया। रोडवेज बसों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। डिपो की अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बॉक्स गायब हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो बस में बैठे यात्रियों को प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल है। सवारियों से टिकट के रुपये वसूलकर परिवहन निगम केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रहा है। यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस तरफ निगम के अफसर भी इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहे हैं।
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बसों में कोहरे के लिए वॉलवेदर बल्ब लगाए जा रहे हैं, जिससे कोहरे में प्रकाश संबंधी कोई दिक्कत न हो। इसके अलावा अनुबंधित बसों के मालिकों को बसों में फॉग लाइट, वाइपर, शीशे आदि सही कराने के लिए निर्देशित किया जा चुका है।
- अजय कुमार, एआरएम, बलिया डिपो।