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नहीं दिख रहे हैं पचरूखिया मझौंवा के क्षतिग्रस्त स्पर

Tue, 07 Jun 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
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गंगा
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मानसून का आगमन होने वाला है। इसके बावजूद डेंजर जोन पचरूखिया मझौंवा पर पहले से बने स्पर संख्या 21 और 22 के बीच बने लांचिग और अपरन पहले से ही  ध्वस्त हो चुके है। बावजूद बाढ़ विभाग अभी मौन धारण किया हुआ है, कि बाढ़  आएगी तो बाढ़ निरोधक कार्य शुरू कराया जाएगा।
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हर साल 15 से 20 जून के बीच मानसून का आगमन हो जाता है। लिहाजा मानसून आने से पहले डेंजर जोन पचरूखिया मझौंवा पर क्षतिग्रस्त हुए स्परों की मरम्मत का कार्य पूरा हो जाना चाहिए। जिससे कि बरसात के दिनों में गंगा के उफान के  समय में हाय तौबा की स्थिति नहीं मचे । लेकिन बाढ़ विभाग अब भी इस समस्या के प्रति सतर्क नहीं है। लोगों का कहना है कि इस वर्ष अच्छा मानसून का पूर्वानुमान है। जिससे बाढ़ आने की स्थिति भी प्रबल होगी। गंगा के मुहाने  पर बसे गांव चौबेछपरा, केहरपुर, दूबेछपरा, गोपालपुर, उदईछपरा के लोगों का  कहना है कि आखिर बाढ़ इस समस्या के प्रति इतना उदासीन क्यों है। जिला प्रशासन समय रहते बाढ़  निरोधक कार्य क्यों नहीं करा रहा है।

कहीं न कहीं जिला प्रशासन के मंशा में  खोट है। अरबों रुपये खर्च कर दूबे छपरा रिंग बंधा को बाढ़ विभाग ने अपने हिस्से में ले लिया। साथ ही विगत वर्ष लाखों रुपये खर्च कर करीब दो किमी तक इसकी लंबाई चौड़ाई को बढ़ाया गया। किसानों ने इस उम्मीद में अपनी जमीने दी कि यह  बंधा बाढ़ के दिनों में रक्षा कवच का काम करेगा। लेकिन विभाग ने मिट्टी का बंधा तो बना डाला। लेकिन गंगा के लहरों को रोकने के लिए न तो कहीं जीओ  विधि से प्लेटफार्म ही बनाया गया न ही पत्थरों को डालकर स्पर ही बनाया गया।  ऐसे में यह सवाल उठता है कि स्पर संख्या 21 और 22 के बीच की स्थिति के  चलते एनएच-31 पर भी खतरा मंडरा सकता है। साथ ही दूबे छपरा रिंग बंधा पर स्पर  नहीं बना तो गांव का भी अस्तित्व मिट सकता है।
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