भृगु ऋषि की तपोस्थली पर लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेला अंतर्गत पशु मेला आरंभ होने के बाद अब कार्तिक पूर्णिमा से लगने वाले मीना बाजार की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं।
एक तरफ मेले की तैयारी में नगर पालिका प्रशासन जुटा है। वहीं दूकानदार सही जगह पर स्टाल लगाने के लिए परेशान हैं। अभी से बिहार, राजस्थान, बाराबंकी, वाराणसी और पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों के कारोबारी नगरपालिका से संपर्क साधने लगे हैं। बहुत से कारोबारियों ने मेले में अपना टेंट और तंबू डाल दिया है।
शहर से सटे डूब क्षेत्र में ददरी मेला अंतर्गत लगने वाले मीना बाजार में सैकड़ों दूकानें कतार में लगाई जाती हैं। इन दूकानों को लगाने के लिए कुछ साल पहले तक पर्याप्त जगह हुआ करता था।
वर्तमान में डूब क्षेत्र में भी अतिक्रमण होने लगा है। इस इलाके में कई रिहायशी मकान भी बन गए हैं। जिला प्रशासन भी सब कुछ देखते हुए खामोश रहा।
इसका नतीजा था कि धीरे-धीरे रिहायशी मकानों की तादाद तेजी से बढ़ी की मेले के स्वरूप को ही बिगाड़ दिया। अब मीना बाजार को मुख्य शहर से जोड़कर लगाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।