जयप्रकाश नगर। तहसील क्षेत्र में मोंथा के असर से हुई बारिश से किसानों की कमर टूट गई है। बोआई के लिए तैयार खेती भी पिछड़ने लगी।
पहले बाढ़ आने से डूब क्षेत्र के खरीफ की फसल उजड़ गई। इसके बाद मोंथा ने किसानों को नुकसान पहंुचाया। जलभराव से अनाज खेत में ही सड़ गए।
मुरार पट्टी किसान टीपू ओझा ने बताया कि पांच बिगहा मटर की खेती के लिए 130 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज रोपण किया था। बारिश ने सब नष्ट कर दिया, जिससे लाखों का नुकसान हो गया। हृदयपुर के किसान रवींद्र यादव बताते है कि आलू के खेत के लिए जुताई कर खेत की तैयारी किया था बारिश से खेत पुनः तैयारी कराना पड़ेगा। बहुआरा निवासी प्रेम तिवारी ने बताया कि तिलहन और परवल की खेती करता हूं, परवल की खेती तो बर्बाद हो गई और तिलहन भी जमने में परेशानी कर रही है।
उधर, केला के खेती पर मोंथा बारिश का असर सबसे ज्यादा पड़ा है। बैरिया तहसील क्षेत्र में करीब बीस हजार एकड़ में केले की खेती हुई है। जिसमें करीब 80 प्रतिशत खेती बर्बाद हो चुकी है।
टोला फतेह राय निवासी किसान सुरेश सिंह पिंटू के अनुसार उन्होंने पंद्रह एकड़ में केले की खेती की थी।
एक एकड़ खेत में कुल 3100 सौ पौधे लगाए जाते हैं। ठेकहां निवासी किसान सुजीत कुमार सिंह का कहना है कि इनके द्वारा करीब 14 एकड़ में केले की खेती की गई थी। जिसमे से एक रुपये भी नहीं निकल पाया है।