पंदह। यूपी बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन, पारदर्शी और पूरी तरह विश्वसनीय बनाने की दिशा में माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में इस बार उत्तर पुस्तिकाओं का न केवल स्वरूप बदला नजर आएगा, बल्कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से कहीं अधिक मजबूत किया गया है। इन बदलावों का मकसद फर्जी और डुप्लीकेट कॉपियों पर पूरी तरह अंकुश लगाना है।
परिषद द्वारा किए गए अहम संशोधन के तहत अब तक चौड़ाई (आड़े) स्वरूप में मिलने वाली उत्तर पुस्तिकाएं इस बार लंबाई (सीधे) स्वरूप में उपलब्ध कराई जाएंगी। नए लेआउट से उत्तर लेखन अधिक सुव्यवस्थित होगा, वहीं मूल्यांकन प्रक्रिया में भी एकरूपता और पारदर्शिता आएगी।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था में किया गया है। उत्तर पुस्तिका के हर पन्ने पर विशेष कलर कोडिंग के साथ परिषद का अधिकृत मोनोग्राम अंकित रहेगा। इस तकनीकी व्यवस्था के जरिए किसी भी स्तर पर नकली या डुप्लीकेट उत्तर पुस्तिका के उपयोग की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। यदि कहीं उत्तर पुस्तिका बदलने या बाहरी कॉपी शामिल करने की कोशिश हुई, तो वह तत्काल पहचान में आ जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में सामने आए नकल और फर्जीवाड़े के मामलों से सबक लेते हुए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है। रंग और मोनोग्राम आधारित पहचान प्रणाली से उत्तर पुस्तिकाओं की प्रामाणिकता की जांच आसान होगी और पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर निगरानी और सख्त हो सकेगी।
दावा है कि इन बदलावों से ईमानदार परीक्षार्थियों को सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल मिलेगा, जबकि नकल माफिया के लिए बोर्ड परीक्षा में सेंध लगाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। नई व्यवस्था के साथ यूपी बोर्ड परीक्षा निष्पक्षता और पारदर्शिता की एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।