बलिया। ठंढ बढ़ने के साथ कुत्ते, सियार, बिल्ली और बंदर अधिक खूंखार हो गए हैं। इनके काटने से जख्मी मरीजों की संख्या गर्मी के दिनों की अपेक्षा करीब तीन गुना बढ़ गई है। गर्मी के दिनों में जहां औसतन 40 से 50 लोग एआरवी का इंजेक्शन लगवाने आते थे, यह संख्या बढ़कर 150 से भी अधिक हो गई है। सभी सीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्ता सड़कों पर और बंदर घरों के अंदर काट कर घायल कर रहे हैं। कुत्तों का प्रजनन माह होने के कारण यह और खतरनाक हो गए हैं। कई मोहल्ले में इनका आतंक है। सिकंदरपुर क्षेत्र में ढाई साल के बच्चे को खेलते समय कुत्ते ने काट कर घायल कर दिया था।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक 31727 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा है, वहीं 2138 लोगों को बंदरों व 731 लोगों को सियार व बिल्ली ने काटा है। चारों के काटने से रेबीज बीमारी होने का भय बना रहता है। रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को हाइड्रोफोविया के नाम से भी जाना जाता है। रेबीज का संक्रमण कुत्ता, बंदर, लंगूर, सियार, लोमड़ी आदि जानवरों के काटने से होता है।
चिकित्सकों के अनुसार, इस बीमारी की चपेट में आकर दुनिया भर में सालाना 50 हजार से ज्यादा लोगों की असमय मौत होती है। इनमें सबसे अधिक मौतें भारत में होती हैं। इसमें लापरवाही जानलेवा साबित होती है। सरकार द्वारा इस बीमारी जागरूकता को लेकर अभियान चलाया जाता है। रेबीज एक खतरनाक बीमारी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। जिले के अस्पतालों में अभी करीब दो हजार आरवी की डोज है। जिला अस्पताल में रोज सौ से डेढ़ सौ लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें बिहार व गाजीपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों से मरीज भी रेबीज का इंजेक्शन लगाने आते हैं। डॉक्टर विजय यादव, प्रभारी सीएमओ बलिया।