जिला महिला अस्पताल परिसर में शुक्रवार को खुलेआम पशु बलि से खलबली मच गई। इस दौरान कई बच्चे व महिलाओं की हालत बिगड़ गई। तीमारदारों की सूचना के बाद भी पुलिस नहीं पहुंची। अस्पताल प्रशासन आस्था के आगे चुपी साधे रखा। लोग बिना रोकटोक के एक के बाद एक बलि देते रहे। ढोल ताशा की तेज आवाज से वार्डों में भर्ती मरीज और ओपीडी में बैठे चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान दिखे।
सदर कोतवाली के जिला महिला अस्पताल परिसर स्थित मां काली मंदिर में मन्नत पूरी होने पर भक्त पूजा पाठ करते हैं। शासन द्वारा खुलेआम बलि की रोक के बावजूद आस्था के नाम पर कुछ लोगों द्वारा खुलेआम खिलवाड़ करने का मामला देखने को मिला। हरपुर निवासी एक परिवार के सदस्य को बीमारी ठीक होने पर उसने बकरे की बलि मां काली के स्थान पर दी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष के सामने खुलेआम पशु की गर्दन काट दी। खून की निकल रही धारा व पशु की हालत देख कई गर्भवती महिलाएं व बच्चे गश खाकर गिर पड़े। उनकी हालत देख वहां खलबली मच गई। कई लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन बलि देने वाले नहीं माने। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। काफी समय बाद भी कोई नहीं पहुंचा। इस बाबत कोतवाल संजय सिंह ने कहा कि इसकी सूचना हमको नहीं है, मामले की जांच करवाता हूं। सीएमएस डाॅ. सुमिता सिन्हा ने कहा कि मंदिर वर्षों पुराना है। लोग पूजा पाठ करते हैं। पशु की बलि देने की जानकारी नहीं है।