बलिया। संपूर्ण समाधान दिवस पर डीएम अदिति सिंह ने सदर तहसील में जनता की समस्याओं को सुना। कुल 82 शिकायती पत्र आए, जिनमें कुछ का मौके पर निस्तारण कराया गया। शेष शिकायतों को अधिकारियों को इस निर्देश के साथ सौंपा कि निस्तारण समयांतर्गत व गुणवत्तापरक कर दिया जाए। समाधान दिवस में चार अधिकारी गैरहाजिर थे, जिनकी वजह से शिकायतों के निस्तारण में दिक्कत हुई। डीएम ने पीओ डूडा, जिला सेवायोजन अधिकारी, महाप्रबंधक उद्योग केंद्र और डिप्टी आरएमओ का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया।
समाधान दिवस में राशन, पेंशन, अवैध कब्जे, भूमि विवाद आदि से जुड़ी समस्याएं ज्यादातर आईं। डीएम अदिति सिंह ने पिछले समाधान दिवसों में शिकायतों के निस्तारण की भी समीक्षा की। इसमें कई विभाग की शिकायतें लंबित पड़ी थी, जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ईओ नगरपालिका बलिया, बीएसए, चकबंद अधिकारी, विकास खंड गड़वार, सोहांव व हनुमानगंज के बीडीओ को नोटिस देकर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा। समय से स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
वहीं, बैरिया तहसील पर कुल 37 मामले आए, जबकि मौके पर छह का ही निस्तारण हो पाया। जल निकासी, राजस्व, पुलिस, बिजली आदि के मामले अधिक रहे। सबलपुर निवासी जितेंद्र यादव ने शिकायत की कि वह 2016 से गांव के पानी टंकी पर तैनात हैं। उन्हें प्रतिमाह तीन हजार रुपये मानदेय देने की बात थी। इन पांच वर्षों के बीच में उन्हें मात्र 20 हजार रुपये मिले हैं। उनके नाम पर एक लाख पांच हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। एसडीएम ने जल निगम के जेई को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। एसडीएम अभय सिंह, सीओ आरके तिवारी, तहसीलदार शिवसागर दुबे आदि थे।
जमीन विवाद के निस्तारण की मांग को लेकर हम संपूर्ण समाधान दिवस पर अब तक चार बार आ चुके हैं। हर बार प्रार्थना पत्र देने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सावित्री देवी, जवाहरनगर, चितबड़ागांव
भूमि की पैमाइश कराने की मांग को लेकर हम चौथी बार संपूर्ण समाधान दिवस पर फरियाद लेकर आए हैं। तत्कालीन कानूनगो द्वारा भूमि के पैमाइश के नाम बरगलाते रहे। अब सेवानिवृत्त हो चुके है। अब तक हमें न्याय नहीं मिल सका।
रामनरायण प्रजापित, फुलवरिया
गांव के ही कुछ लोग द्वारा भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। अवैध कब्जा हटाने के लिए हम कई बार संपूर्ण समाधान दिवस पर गुहार लगा चुके हैं। इसके बाद भी हमारी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया गया।
अमरनाथ सिंह, परिखरा
हमने अपनी बहू और बेटी के नाम से भूमि खरीदी थी। उसी गांव के एक व्यक्ति द्वारा भूमि की खरीद के बाद पट्टा कराकर कब्जा कर लिया गया। मामले में जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उमाशंकर रावत, देवकली