बलिया। हर साल नगर पालिका प्रशासन बारिश से पहले शहर के छोटे-बड़े करीब 26 नालों की सफाई का दावा करता है। सफाई के नाम पर मोटा बजट भी खर्च किया जाता है, लेकिन तमाम दावों के बाद भी नगर वासियों को बरसात के दिनों में जलभराव की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस बार जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार के निर्देश के बावजूद नगर पालिका नाला सफाई को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। जबकि बीते सप्ताह कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक में डीएम ने बरसात का मौसम से आने पूर्व ही शहर के सभी नालों की सफाई कराने का निर्देश दिया था।
उधर, शहर में होने वाली जलभराव की समस्या से बेपरवाह नगर पालिका के जिम्मेदार व्यस्तता का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ने में व्यस्त है।
नागरिकों का कहना है कि कर्मचारी आते हैं और नालों के ऊपर से ही कूड़ा उठाकर ले जाते है। नालों के चोक होने से लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ता है।
पाश इलाके कलेक्ट्रेट परिसर सहित शहर के कई मोहल्लों में जलभराव होता है। वहीं करीब 20 साल से बहुत प्रशिक्षित सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब तक मूर्त रूप नहीं ले पाया है। इसकी वजह से भी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पैदा होती है।
चोक हुए नाले बन सकते हैं परेशानी का सबब: गंदगी से चोक नाले शहरवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। अभी तक नगर पालिका ने इनकी सफाई नहीं कराई। कुछ नाले क्षतिग्रस्त भी हैं, इनको सही नहीं कराया गया। कई जगह नालों के पानी की निकासी पूरी तरह से बंद है।
यही नाले शहर के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकते हैं, क्योंकि ये नाले शहर के अंदर हैं और इन्हीं की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अगर समय से पहले नाले साफ नहीं हुए तो इन चोक नालों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुसना तय है।
जलभराव से जूझते हैं दो हजार परिवार: विगत कई वर्षों से श्रीराम बिहार कालोनी के 100, कल्पना कॉलोनी के 200, आवास विकास कॉलोनी के 1000, विवेकानंद कॉलोनी के 100, रामदहिनपुरम कॉलोनी के 500, जेल कॉलोनी के 50, पुलिस लाइन में करीब 300 आवास व टैगोर नगर के करीब 20 से 25 घरों के अलावा काजीपुरा मोहल्ला की बड़ी आबादी प्रतिवर्ष जलभराव की समस्या से जूझती है।