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सूर्योपासना का महापर्व छठ आज से

Thu, 03 Nov 2016 10:07 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
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सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा। घर की साफ-सफाई कर नहाय-खाय के साथ ही छठ व्रत शुरू करेंगी। इस दौरान नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के गली- मोहल्लों में छठ मईया के गीतों गूंजते रहे। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में शुद्धता एवं स्वच्छता का काफी ध्यान रखा जाता है। आज व्रती महिलाएं चने की दाल, लौकी की सब्जी और अरवा चावल का भात खाकर पर्व की शुरूआत करेंगी। 
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शुक्रवार को नहाय खाय होने के कारण गुरुवार को नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के चट्टी चौराहों पर लौकी की जबरदस्त मांग रही। शुक्रवार को स्नान करने के बाद व्रती महिलाएं शाम को लौकी की सब्जी और चने की दाल के साथ ही अरवा चावल के भात से व्रत की शुरूआत करेंगी। अगले दिन शनिवार पांच नवंबर को खरना (निर्जला व्रत) रखकर शाम को गुड़ से निर्मित बखीर, रोटी तथा फल का पारण किया जाता है।

वहीं छह नवंबर षष्टी तिथि से निर्जला व्रत शुरू होगा और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं पूजन-अर्चन शुरू कर देती हैं। इस दौरान कई रात्रि जागरण कर भजन कीर्तन करेंगी। फिर सुबह सप्तमी तिथि सात नवंबर सोमवार को उदयांचल सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का पारण करेंगी। छठ पूजा के लिए गुरुवार को तालाबों और गंगा घाटों की साफ-सफाई के साथ ही वेदियों के निर्माण भी व्रती महिलाओं और उनके परिवार के लोगों द्वारा शुरू कर दिया गया।
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वहीं कुछ घरों में पूजा में बनने वाले विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं धोने सूखने का काम भी हो गया और कुछ घरों से आज से शुरू होगा। चूंकि इस पर्व में शुद्धता का विशेष महत्व है इसलिए इस बात का ध्यान रखा जाता है कि पूजा के गेहूं को पक्षी जूठा न करें। 
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