चौबे छपरा में गंगा के बाढ़ की प्रलयंकारी लहरों से नदी में विलीन होता रिहायशी इलाका।
गंगा का कहर चौबे छपरा में सोमवार को भी जारी रहा। इस दौरान जहां पांच मकान गंगा में विलीन हो गए वहीं लालाबगीचा से लेकर चौबेछपरा तक करीब चार बीघा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। कटान को देखते हुए लोग दिनरात खाने पीने की चिंता छोड़ घरौदों को उजाड़ने में जुटे हैं।
चौबेछपरा में सोमवार को गंगा की उफनाती लहरों के बीच सुबह से कटान शुरू हुआ। दिनभर हुए कटान में गांव निवासी बसंत मिश्रा, जगपत, अभिराम, अरुण और शंभू का घर गंगा में विलीन हो गया। चौबेछपरा लालाबगीचा श्रीनगर के कटान पीड़ित सामानों को सहेजने में जुटे हुए थे। डेंजर जोन पचरूखिया मझौंवा पर बने स्परों पर नदी की बैकरोलिंग धारा का दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
पानी निचले सतह में फैलने से गायघाट, प्रबोधपुर, मझौंवा, दियरी बाबूवेल, बादिलपुर का निचला सतह पानी में डूब गया है। इसी तरह बढ़ाव बना रहा तो दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाएंगे। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार, सोमवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 57.08 मीटर दर्ज की ग गई। साथ ही प्रतिघंटा तीन सेमी का बढ़ाव बना हुआ है । जबकि डेंजर लेवल (लालनिशान) 57.615 मीटर है ।