फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट 2016

Mon, 29 Feb 2016 09:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बलिया
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा जारी आम बजट 2016-17 संसद में सोमवार को पेश किया गया। बजट को लेकर पूरे दिन नगर सहित ग्रामीणांचलों में चर्चा जारी रही।
विज्ञापन


सबसे दिलचस्प यह रहा कि मोदी सरकार के इस बजट से लोगों को जो अपेक्षाएं थी, वह पूरी नहीं हो सकी। बजट में आंकड़ों को दिखाकर सरकार ने वाहवाही लूटने का कार्य किया है। बजट से सामान्य जनमानस को कहीं राहत मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।

बजट में युवाओं के लिए, महिलाओं और गुरबत में जीने वालों को कुछ भी खास नहीं मिला है। एक तरह से कहा जाय तो लोगों को बजट के माध्यम से लालीपाप देने का कार्य किया गया है। आम बजट पर नजर दौड़ाएं तो गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को कहीं से राहत नहीं मिला है।
विज्ञापन


गरीब तबके के लोगों के साथ बैंक के ब्याजदरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। केंद्र सरकार ने एक तरफ बजट में लोगों को लुभाने के लिए गरीबों को गैस कनेक्शन देने की घोषणा की गई है, वहीं गैस की कीमतों को कम करने के बारे में सोचा तक नहीं है।

 इस बजट से जहां अमीर लोगों में खुशी है कि टीवी, मोबाइल, लैपटाप सहित इलेक्ट्रानिक उपकरण सस्ते किए गए है। गरीबों के प्रयोग वाली वस्तुओं के मूल्य में कमी करने की बजाय सर्विस टैक्स का भार डाल दिया है। खासतौर से युवा वर्ग के लिए चितित सरकार की बजट में कोई रोजगार की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है।

जिससे युवाओं का शोषण रोका जाय। वहीं निजी संस्थाओं में हो रहे शोषण के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया गया है। कामगार श्रमिकों के लिए कोई खास व्यवस्था बजट में नहीं है। जिससे कि ठेकेदारों के बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाई जाय।


डा. तोसिका सिंह  ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में कुछ भी नया नहीं है। आमजन को लाभ पहुंचाने की कोशिश भले ही बजट में की गई है। लेकिन इससे कोई लाभ किसी को भी होने वाला नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि कर्मचारी के आयकर स्लैब में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। जिससे एक आम कर्मचारी भी कर के दायरे में आ चुका है।


 रवि कुमार तिवारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने बजट में कर्मचारियों की अनदेखी की है। कर्मचारियों को बजट में राहत की जगह नुकसान पहंचाया गया है। कुल मिलाकर कांग्रेस के बजट का ही दूसरा रुप प्रस्तुत किया गया है। जिससे आम कर्मचारी भी कर के दायरे में आ रहे है।


 डा. बीके गुप्ता ने बताया कि जेटली के बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है। जिससे कर्मचारियों को राहत मिले। इस बजट में पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है। बजट से मध्यम एवं गरीब तबके के लोगों का कोई भला होने वाला नहीं है। आयकर का स्लैब भी पुराना रखा गया है।


शिक्षक नेता धीरज राय ने बताया कि केंद्र सरकार का यह बजट कर्मचारी एवं श्रमिकों के हित में नहीं है। बड़े अफसरों एवं पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला यह बजट है। कर्मचारियों को महंगाई के हिसाब से आयकर स्लैब में छूट देने की जरुरत है।
महिलाएं बोलीं


सुभद्रा गुप्ता ने बजट पर तीखी प्रतिकिया व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने अपने बजट में महिलाओं को कोई खास तवज्जों नहीं दिया है। बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है कि महिलाओं को सशक्त एवं रोजगार उन्मुख बनाया जा सके। यह बजट गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार के खिलाफ है।


 हेमलता देवी ने बताया कि हर बार की बजट में महिलाओं के लिए कुछ खास योजनाओं की घोषणा रहती थी। लेकिन जेटली ने अपने बजट में ऐसा कोई घोषणा नहीं किया है। बजट में बस उच्च आयवर्ग के लोगों के हिसाब से प्रस्तुत किया गया है। जिससे गरीबों का भला होने वाला नहीं है।


 मंजू देवी ने बताया कि महिला सशक्तिकरण पर जोर देने वाली मोदी सरकार के बजट में महिलाओं के लिए कोई खास पैकेज नहीं है। महिलाओं को महंगाई से निजात दिलाने की व्यवस्था भी आम बजट में कहीं नहीं दिख रही है।


सुनीता पाठक ने बताया कि महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने कोई प्रावधान नहीं दिखाया है। हुनरमंद महिलाओं के लिए भी कोई सहायता आदि की घोषणा नहीं की गई है। यह बजट आम जनता के सोच से कोसों दूर है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें