Ballia News: लखनऊ में रसड़ा से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उनका शव बलिया स्थित उनके आवास पर लाया गया। इसके बाद शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस बीच पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने एक साथ नम आंखों से विधायक को अंतिम विदाई दी।
बलिया ने बृहस्पतिवार से शुक्रवार तक ऐसा दृश्य देखा, जिसने फिर साबित कर दिया कि जिले की सबसे बड़ी पहचान उसकी इंसानियत और सामाजिक एकजुटता है। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब केवल एक जनप्रतिनिधि को श्रद्धांजलि देने नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व को विदाई देने पहुंचा था, जिसने राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी।
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लखनऊ से लेकर बलिया तक हजारों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम दर्शन के लिए इतनी भीड़ थी कि कदम रखने तक की जगह नहीं बची लेकिन इस भीड़ में न किसी दल का झंडा था न राजनीतिक नारे। हर चेहरा गमगीन था और हर आंख नम। माहौल ऐसा था, मानो पूरा जनपद अपने परिवार के किसी सदस्य को खो देने के दुख में डूब गया हो।
अंतिम यात्रा में सत्ता और विपक्ष के तमाम नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक एक साथ नजर आए, जो नेता राजनीतिक मंचों पर अक्सर एक-दूसरे के विरोधी दिखाई देते हैं, वे भी इस मौके पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। किसी की आंखों से आंसू छलक रहे थे तो कोई मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था। उस पल न कोई भाजपा का था, न समाजवादी पार्टी, न बसपा और न कांग्रेस का। हर व्यक्ति केवल बलिया का नागरिक बनकर अपने नेता को विदाई देने पहुंचा था।
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भीड़ ने यह संदेश भी दिया कि राजनीति विचारों का मतभेद हो सकता है लेकिन मानवीय रिश्तों और संवेदनाओं की कोई सीमा नहीं होती। बलिया की यही परंपरा रही है कि विपत्ति और दुख की घड़ी में राजनीतिक, सामाजिक और जातीय विभाजन स्वतः समाप्त हो जाते हैं और सबसे आगे इंसानियत खड़ी दिखाई देती है।
जनपद के लोगों का कहना था कि कुछ व्यक्तित्व केवल चुनाव नहीं जीतते, बल्कि अपने व्यवहार, सहजता और जनसेवा से लोगों का विश्वास और प्रेम भी जीत लेते हैं। ऐसे लोगों की विदाई केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द बन जाती है।