श्री मुरली मनोहर स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कक्ष में रविवार को विश्व हिंदी दिवस पर विचार और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘विश्व पटल पर हिंदी’ विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी को विश्व पटल पर अधिकार दिलाने की बात रखी।
इस मौके पर मुख्य अतिथि डा. श्रीराम सिंह ने कहा कि 2006 में डा. मोहन सिंह ने दस जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में घोषित किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डा. अमलदार नीहार ने कहा कि राजभाषा बनाए जाने के बावजूद राजनीति कारणों में आगामी 15 वर्षों में हिंदी को बड़ी मान्यता नहीं मिली।
कहा कि विश्व के विचारों के अदान-प्रदान के लिए दूसरी भाषा में विशेष रूप से हिंदी में अनुवाद होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डा. नरेंद्र तिवारी ने कहा कि हिंदी अनुवाद कार्य में जुटे हुए लेखकों की प्रशंसा की कड़ी में बलिया के साहित्यकारों का उल्लेख किया। जिसमें डा. नीहार द्वारा रघुवंश महाकाव्य के अनुवाद की चर्चा की।
साथ ही जनपद के कृष्ण बिहारी मिश्र, अमरकांत, भगवती प्रसाद द्विवेदी, डा. केदार नाथ सिंह को हिंदी में विशेष योगदान के लिए सराहना की। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डा. जनार्दन राय ने कहा कि समाचार पत्र के प्रकाशन से हिंदी को बड़ा बल मिला है और उसके लिए जनभाषा के रूप में साधारण शब्दों का प्रचार-प्रसार मिला है।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक जी ने कहा कि विश्व पटल पर हिंदी का अधिकार दिलाना जरूरी है। कहा कि रचनाएं रहेंगी तो विश्व पटल पर हिंदी लाना आसान है। डा. निशा ने कहा कि साहित्यकार नहीं मैं हिंदुस्तानी है।
हमारी माता भारत माता है और मेरी मातृभाषा हिंदी है और इसको राष्ट्र भाषा का दर्जा लाने के लिए सबको ठोस कदम उठाना होगा।
संत ग्राम्यांचल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. पंकज चौधरी ने हिंदी को और मजबूत करने के लिए सभी सरकारी कार्यों को हिंदी में निपटाने के साथ ही हिंदी के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। कवि गोष्ठी में शिवराज पांडेय रसराज, शाश्वत, उत्कर्ष तिवारी, त्रिभुवन,
प्रीतम, मनीष कुमार पांडेय, देवांश, बेचैन जी, बिहारी, डा. निशा राघव आदि रहे। इस मौके पर रामगणेश उपाध्याय, डा. अजय बिहारी पाठक, डा. देवनाथ चतुर्वेदी, अजय पांडेय, विनय कुमार सिंह,
अनंत प्रसाद, संतोष प्रसाद गुप्त, डा. दयानंद राय, डा. राजीव कुमार, डा. भागवत प्रसाद, डा. ओंकार सिंह, डा. संजय सरोज, डा. विश्राम यादव, डा. ओपी सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. जनार्दन राय आदि रहे।