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आवास बनवाने में गोलमाल, मुकदमा दर्ज कर अफसर शांत

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बलिया। अब तक संचालित आवास योजनाएं भ्रष्टाचार का शिकार हो रह गईं। इतना नहीं पीएम आवास योजना भी इससे अछूता नहीं रहा। आज भी पात्र जहां भटक रहे हैं वहीं अपात्र मलाई काट रहे हैं। कई जगह तो धन का ही गोलमाल हो गया और अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज कर कोरम पूरा कर लिया।
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वर्ष 2015-16 के ढाई दशक पूर्व से संचालित इंदिरा आवास योजना में भी खूब धांधली की गई। दर्जनों गांवों में एक ही बीपीएल नंबर पर अलग-अलग वर्षों में एक ही परिवार को लाभ दिया गया। वर्ष 2008-09 से वर्ष 2012 तक संचालित महामाया आवास में भी खूब धांधली की गई। यह योजना केवल अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए लागू की गई लेकिन कई गांवों में जाति बदल कर आवास का आवंटन कर दिया गया। कई मामलों में शिकायत के बाद जांच शुरु हुई लेकिन प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2013-14 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने लोहिया आवास योजना का संचालन किया लेकिन यह योजना भी भ्रष्टाचार की शिकार हो गई और मानक के विपरीत कई गांवों में आवंटन किया गया। कई गांवों में फर्जी आय प्रमाण पत्र के आधार पर आवास का आवंटन कर दिया गया। कई शिकायतों की जांच भी शुरू हुई लेकिन एक बार फिर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के कारण यह सारे मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।
वर्ष 2015-16 में पूर्व से संचालित इंदिरा आवास योजना के स्थान पर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया। इस योजना के तहत आवास आवंटन के तरीकों में भी बदलाव करते हुए सेक ( सामाजिक आर्थिक जातीय गणना) सूची में शामिल गरीबों को आवास देने का प्रावधान किया गया। हालांकि यह योजना पूरी तरह वर्ष 2016-17 में धरातल पर उतरी। सेक डाटा में आवास को लेकर बनी स्थाई प्रतीक्षा सूची से आवास की सूची सीधे संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ की लॉगिन पर भेजने व उसका संबंधित ग्रामसभा से सत्यापित कराकर आवंटित करने की व्यवस्था की गई। लेकिन इसमें भी खूब मनमानी की गई। चहेते को आवास के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए। कई गांवों में तो सूची में लाभार्थियों को गांव में नहीं रहते या अपात्र बना कर निचले पायदान वाले को आवंटित कर दिया गया। आलम यह रहा कि आवंटन से लेकर भुगतान तक में खूब धांधली व बंदरबांट किया गया। आए दिन अधिकारियों के यहां इसकी शिकायतें पहुंची लेकिन हर बार जांच के नाम पर कोरम व लीपापोती की जाती रही। कुछ मामलों को अधिकारियों ने संज्ञान भी लिया तो वह अंजाम तक नहीं पहुंचा और अधिकांश मामले ठंडे बस्ते में पड़े रहे। कुछ मामलों में तो कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई।
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पीएम आवास आवंटन के शुरुआती दौर में ही शुरु हुआ खेल
वर्ष 2016-17 में पीएम आवास आवंटन के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों ने व्यवस्था को तार-तार कर दिया। इतना ही नहीं मनचाहे लाभार्थियों के चयन के लिए कर्मचारियों ने उपर के क्रम पर अंकित पात्रों को हटाने के लिए या तो गांव में नहीं रहते या फिर अज्ञात लिखकर खेल कर दिया। नवंबर 17 में ऐसे करीब 560 मामले सामने आने पर डीआरडीए के पीडी ने सभी बीडीओ को पत्र भेजकर आपत्ति जताई और कारण बताते हुए इन पात्रों का सत्यापन करने को कहा। लेकिन इसके बाद न तो बीडीओ ने कोई कार्रवाई की और न ही पीडी व अन्य अधिकारियों ने ही इसकी सुधि ली। इस तरह के अधिकांश मामले सोहांव, दुबहड़, सीयर आदि ब्लाकों से आए थे।
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जाति बदलकर दोबारा दे दिया पीएम आवास
करीब तीन वर्ष पहले दुबहड़ ब्लॉक के घोड़हरा गांव के भोला राम व हरेराम ने सीडीओ को शिकायत कर बताया कि उनका नाम सेक डाटा में था लेकिन यह आवास पिछड़ी जाति के भोला व हरेराम को आवंटित किया गया है। सीडीओ ने मामले की जांच जिला ग्राम्य विकास संस्थान के जिला प्रशिक्षण अधिकारी सुनील कुमार से कराई। जांच में सामने आया कि सेक डाटा में शामिल हरेराम को वर्ष 2010-11 में इंदिरा आवास उपलब्ध कराया गया है और इसके लिए उसे 45 हजार की धनराशि भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद इस लाभार्थी का पंजीयन प्रधानमंत्री आवास के लिए लिए किया गया जो नहीं होना चाहिए था। इसके स्थान पर गांव के ही दूसरे हरेराम पुत्र रामनाथ तुरहा के खाते में प्रधानमंत्री आवास की धनराशि भेजी गई जो कि गलत है। लेकिन इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
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जांच के बाद कार्रवाई के नाम पर कोरम
अप्रैल 18 में हाईकोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन सीडीओ ने नवानगर ब्लॉक के कठौड़ा गांव में आवंटित पीएम आवास की जांच जिला विकास अधिकारी व नवानगर ब्लॉक के एडीओ पंचायत की टीम से कराई थी। डीडीओ ने आवास निर्माण में कई गड़बडियां पाई थीं। इसमें एक ही परिवार को दो बार आवास देने व गलत खाता नंबर दर्ज कर खाता फ्रीज करने आदि की गड़बड़ियां सामने आईं थीं। डीडीओ ने इस धांधली के लिए ग्राम विकास अधिकारी राजभुवन प्रसाद व ब्लॉक के सहायक लेखाकार माजिद अली को दोषी माना। कार्रवाई के नाम पर केवल कोरम किया गया।
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सांसद आदर्श गांव ओझवलिया में भी हुआ खेल
नवंबर 17 में सांसद आदर्श गांव ओझवलिया के कुल 179 लाभार्थियों की सूची डीआरडीए को भेजी गई। इसके बाद डीआरडीए के तत्कालीन पीडी ने जनवरी 18 में सांसद आदर्श गांव की सूची के कुल 179 लाभार्थियों का सत्यापन किया तो इसमें 147 लाभार्थी अपात्र मिले। उन्होंने बीडीओ को पत्र जारी कर सही तरीके से सत्यापन कर लाभार्थियों की पत्रावली प्रस्तुत करने को कहा। लेकिन इसके बाद मामले ठंडे बस्ते में रख दिया गया। इस गांव में कुल 32 ही पात्र थे जबकि धनराशि 78 लाभार्थियों को भेजा गया। लेकिन यह प्रकरण भी ठंडे बस्ते में ही रह गया।
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छह वर्ष में 49480 पीएम आवास आवंटित
16-17 - 9842
17-18 - 6602
18-19 - 7133
19-20 - 5880
20-21 - 11424
21-22 - 8599
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पीएम आवास आवंटन आदि को लेकर आने वाली शिकायतों की जांच कराई जाती है। कई मामलों में कार्रवाई भी हो चुकी है। कुछ मामलों में मुकदमा भी दर्ज है जिसकी विवेचना पुलिस की ओर से की जा रही है।
डीएन दुबे, पीडी, डीआरडीए, बलिया।
गड़बड़ियां धड़ल्ले से
सांसद आदर्श गांव में फर्जी खाता खोलवा कर निकाले 2.80 लाख
सांसद आदर्श गांव कुशहर में सात लाभार्थियों के नाम से फर्जी खाता खोलवा कर आवास की पहली किश्त 2.80 लाख का आहरण कर लिया गया। खुलासा के बाद रेवती ब्लॉक के कुशहर गांव के प्रधान, सचिव, सेक्टर अधिकारी के अलावा दो बैकों के शाखा प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज कराकर अधिकारियों ने कोरम पूरा कर लिया।
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आवास के नाम पर वसूली में प्रधान पर मुकदमा
प्रधानमंत्री आवास के नाम पर वसूली करने के आरोप में तीन वर्ष पहले मई महीने में बांसडीह रोड पुलिस ने दुबहड़ ब्लॉक के हरिपुर गांव के तत्कालीन प्रधान शिवकुमार गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने यह कार्रवाई तत्कालीन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत के निर्देश पर की।
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छह लाभाथियों को दोबारा दिया आवास
मुरलीछपरा ब्लॉक के कर्णछपरा गांव में इंदिरा आवास के लाभार्थियों को ही दोबारा प्रधानमंत्री आवास आवंटित करने का मामला सामने आ चुका है। आरटीआई से खुलासा हुआ कि छह प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थी पूर्व के वर्षों में इंदिरा आवास का लाभ ले चुके हैं। बीडीओ ने लाभार्थियों से रिकवरी की कार्रवाई करने का दावा किया लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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154 आवास आज भी पूरे नहीं, 84 से हुई रिकवरी
बलिया। जिले में पूर्व के सालों में आवंटित 154 पीएम आवास अभी तक नहीं बन सके हैं। इन लाभार्थियों के खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई की गई। इसमें से 84 लोगों से रिकवरी हो चुकी है और शेष लाभार्थियों से रिकवरी होनी है।
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