अगर जल्द ही मतदाता सूची दुरुस्त नहीं की गई तो इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में बिहार के बाशिंदे भी मतदान करेंगे। मूलरूप से यूपी के रहने वाले ये लोग वर्तमान में समय बिहार के निवासी बन चुके हैं। मामला बैरिया तहसील के गोपालनगर गांव में सामने आया है, जहां के दर्जनों परिवार करीब एक दशक पूर्व घाघरा नदी के कटान से बेघर होने के बाद नदी पार बिहार के सारण जिला अंतर्गत डुमायीगढ़ और फुलवरिया में जाकर बस गए, लेकिन उनका नाम अभी भी बैरिया की मतदाता सूची में चल रहा है।
ऐसे लोगों की संख्या सौ के करीब है। यूपी में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, बावजूद उनका नाम यहां की मतदाता सूची में चल रहा है। ऐसे में ये लोग यहां आकर मतदान कर सकते हैं। करीब एक दशक पूर्व घाघरा नदी के कटान में गोपालनगर के कई घर विलीन हो गए।
बेघर होने के बाद यहां के लोग नदी उस पार बिहार के सारण जिला अंतर्गत डुमायीगढ़ व फुलवरिया गांव में जाकर बस गए। एक दशक से ऊपर समय से यह बिहार के बाशिंदे बन चुके हैं और वहां का मतदाता पहचान पत्र भी उन्हें जारी किया जा चुका है, जिस कारण इन्हें बिहार सरकार की सारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। लेकिन इनकीखेती उतर प्रदेश के गोपालनगर इलाके में है।
साथ ही अन्य छोटा-मोटा कारोबार भी यूपी में होता है। यह मामला करीब पांच वर्ष पहले भी प्रकाश में आया था। बावजूद आज तक मतदाता सूची को दुरुस्त नहीं किया गया। जिन लोगों का नाम मतदाता गोपालनगर के मतदाता सूची में है, उनमें गोपाल पुत्र रामनंद, प्रभु पुत्र जनक, परमात्मा पुत्र बैजनाथ, संजय पुत्र वशिष्ठ, रमेश पुत्र राजनारायण, मधुसूदन आदि हैं।