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कार्तिक पूर्णिमा स्नान होगा, नहीं लगेगा ददरी मेला

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बलिया। ददरी मेले के आयोजन को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक हुई। इसमें कोविड-19 को देखते हुए मेले के आयोजन को लेकर सब के सुझाव लिए गए। अंतत: कोविड-19 से लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इस वर्ष ददरी मेला स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
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जिलाधिकारी एसपी शाही ने कहा कि ददरी मेले को लेकर जो भी संशय है, कोरोना महामारी से जनता को बचाने को लेकर है। ऐसे आयोजन की गाइड लाइन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बृहद मेला में कोविड प्रोटोकाल का शत अनुपालन करा पाना मुश्किल होगा। मेले में दो सौ से अधिक भीड़ हर हाल में हो जाएगी। इसलिए मेला कराना और उसके बाद जिले को लॉकडाउन की स्थिति में ले जाना कहीं से भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान होगा, पर उस दिन किसी भी प्रकार का सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ देशों में फिर इस महामारी ने वापसी की है और लॉकडाउन होने लगा है। ठंढ के साथ और तेजी से फैलाव की संभावना जाहिर की जा रही है। प्रदेश मुख्यालय के स्वास्थ्य विभाग से भी अब एल-2 अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। बलिया की स्थिति देखें तो जुलाई-अगस्त में यह बीमारी जिले को सबसे ज्यादा प्रभावित की थी। वर्तमान में सुधार हुआ है पर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। नगरपालिका परिषद बलिया का कोई ऐसा वार्ड नहीं है, जहां एक भी केस नहीं है। दो सौ से अधिक कंटेंमेंट जोन हैं। आज भी मुहल्ला भृगु आश्रम में 31 मरीज, पुलिस लाइन में 13, आनंदनगर में 10 मरीज हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत सारी परंपरागत गतिविधियों पर विराम लगा है। विभिन्न जगहों पर आयोजित होने वाले महावीरी जुलूस, मथुरा का गोवर्धन मेला, गढ़ मेला जैसी पारंपरिक गतिविधियां स्थगित हुईं। इसलिए लोगों की सुरक्षा के लिए मेला नहीं कराया जाना ही उचित होगा। बैठक में सीआरओ विवेक श्रीवास्तव, एडीएम रामआसरे, एसडीएम सदर राजेश यादव, डिप्टी कलेक्टर सर्वेश यादव, सीओ सिटी अरुण सिंह, नपा चेयरमैन अजय कुमार, ईओ दिनेश विश्वकर्मा आदि अधिकारी थे।
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राजकीय मेला घोषित कराने में करेंगे समय का सदुपयोग
बलिया। ददरी मेले को राजकीय मेला घोषित करने की मांग को लेकर कहा कि इसका पूरा प्रयास किया जाए। मेला का आयोजन नहीं होता है तो इस समय का उपयोग इसी कार्य में किया जाए। शासन से बात हुई है। इससे संबंधित प्रारूप मंगवाया गया है। इस पर जरूरी विवरण भरकर भेजा जाएगा। इसके बाद जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के स्तर पर पहल कर ददरी मेला को राजकीय मेला घोषित करने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि मेला भूमि का फाइनल चयन कर लिया जाए तो इस दिशा में एक बड़ी बाधा दूर हो जाएगी।
बलिया गान बनवाने को लेकर सुझाव
बलिया। जिलाधिकारी ने कहा कि बलिया पर आधारित कोई गीत बलिया गान होनी चाहिए। ददरी मेला के खाली समय में ही इसे बनवा लिया जाए तो बेहतर कदम होगा। सुझाव देते हुए कहा कि इसके लिए पहले कई गीत लिखवाए जाएं। फिर सोशल स्टेज पर बेहतर गीत चुनने के लिए वोटिंग कराई जाए। सबसे बेहतर तीन गीत चुना जाए और उससे गवाकर सुना जाए। फिर उसमें से सबसे बेहतर गीत का चयन हो। इसके लिए गीत लिखने वाले को एक लाख का इनाम दिया जाएगा। ददरी मेला का आयोजन नहीं होने से मिलने वाले एक महीने के खाली समय में ही इस तरह की सकारात्मक पहल हो। इसमें होने वाले खर्च को लेकर चेयरमैन अजय कुमार ने आश्वस्त किया। इसके साथ ही ददरी मेला स्मारिका भी तैयार कराने की बात कही।
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