महर्षि भृगु कॉरिडोर परियोजना
बलिया, जो गंगा और सरयू के संगम क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है, अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचान रखता है। यहां स्थित महर्षि भृगु आश्रम आस्था और प्राचीन परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहीं महर्षि भृगु ने तपस्या की थी और भृगु संहिता की रचना की थी, जिससे इस क्षेत्र को ज्योतिषीय परंपरा से जोड़ा जाता है। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ददरी मेले के कारण भी विशेष महत्व रखता है। बीते कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के विकास के लिए महर्षि भृगु कॉरिडोर परियोजना पर काम किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मंदिर क्षेत्र, गंगा तट और मेले के इलाके को एकीकृत धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना है।
बलिया में ओडीओपी और सत्तू कारोबार
बलिया में ओडीओपी योजना के बाद सत्तू कारोबार से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। छोटे लाल साहनी सहित स्थानीय कारोबारियों ने बताया कि पहले पारंपरिक तरीके से उत्पादन किया जाता था, लेकिन अब उत्पादन क्षमता में बदलाव आया है। कारोबारियों के अनुसार सत्तू की मांग आसपास के जिलों के साथ साथ अन्य राज्यों और विदेशों तक भी पहुंच रही है। उनका कहना है कि गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी के साथ साथ सऊदी अरब और अमेरिका तक भी सत्तू का निर्यात हो रहा है।
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय पर बातचीत
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार की योजनाओं के तहत प्रयास जारी हैं। उनके अनुसार 2017 के बाद से विश्वविद्यालय के विकास और विस्तार की दिशा में लगातार कार्य हो रहा है।