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सीवर घोटाले में 11 अफसरों की फंसेगी गर्दन, दिए जाएंगे आरोप पत्र...

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बलिया। शहर में 13 सालों से चल रहे सीवर निर्माण में धांधली की 10 माह पहले हुई टीएसी जांच का असर होने लगा है। बनारस के बाद जिले की भी सीवर घोटाले की फाइल शासन में खुल गई है। इस मामले कई अधिकारियों व कर्मियों का गला फंस सकता है। जल निगम के चेयरमैन जी पटनायक ने टीएसी जांच रिपोर्ट के आधार पर फैजाबाद मंडल के अधीक्षण अभियंता को जांच अधिकारी बनाते हुए दोषियों से स्पष्टीकरण प्राप्त कर चार्जशीट देने को कहा है। इसको लेकर विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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सीवर निर्माण के साल से लेकर अब तक के अधिशासी अभियंताओं समेत 11 अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। इस घोटाले का खुलासा अमर उजाला ने 23 मई 18 से लेकर लगातार किया और जांच दर जांच हुई। उधर, इस मामले में इंटक के जिलाध्यक्ष की ओर से घोटाले की जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। शहर में जल निगम की ओर से पिछले 13 सालों से चल रहे सीवर निर्माण में करोड़ों के घोटाले के शिकायत की जांच के लिए शासन के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीएसी नौ अक्तूबर 18 को धमकी थी। टीम के सदस्यों ने कार्यालय में पत्रावलियों को खंगालने के बाद मौके पर जाकर सीवर निर्माण का जायजा भी लिया था।
करीब नौ साल पहले सिटी जोन को नगर पालिका को हस्तांतरण होने के बाबत नगर पालिका जाकर भी कर्मियों से पूछताछ की थी और टीम दूसरे दिन प्रदेश मुख्यालय चली गई। सूत्रों की मानें तो टीम के हाथ सीवर निर्माण में गड़बड़ी के कई सबूत हाथ लग चुके थे। जांच के दौरान विभाग के अधिकारियों ने भटकाने का भी प्रयास किया था लेकिन टीम के मुखिया व व्यवस्था जल निगम लखनऊ के सचिव बीएल गौतम ने इसे अनसुना करते हुए कई कागजातों की छाया प्रति कराकर उसे रख लिया। हालांकि टीम ने कुछ बताने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि गोपनीय जांच है और इसकी पूरी रिपोर्ट विभाग के एमडी को सौंपी जाएगी। उस समय यह भी सामने आया था कि टीम ने सीवर निर्माण के लिए बने प्राक्कलन से लेकर विभाग की ओर से निर्धारित एजेंसी की ओर से किए गए सभी बांड की पड़ताल की है।
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बांड के सापेक्ष एजेंसी की ओर से विभाग के नाम से जमा की गई जमानत राशि के कागजातों को भी देखा है, जिसमें कई कमियां मिली हैं। टीम ने सिविल लाइन जोन में चल रहे सीवर निर्माण को भी देखा था, जहां कई कमियां मिली। टीम ने शहर का चक्रमण किया तो कई जगह सड़क पर मैनहोल तक नहीं दिखे, जिसे नोट किया और इस बाबत अधिकारियों से पूछताछ की थी। बताया जाता है कि बनारस में सीवर में धांधली आने के बाद शासन ने सख्य रवैया अपनाया है और जिले में भी 13 सालों से बन रहे सीवर को संज्ञान लिया है। टीएसी जांच रिपोर्ट पर जल निगम के एमडी विकास गोठवाल व चेयरमैन जी पटनायक ने पांच एक्सईएन के साथ कई एई व जेई समेत कुल 11 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोप पत्र देने को कहा है। इसके लिए चेयरमैन ने विभाग के फैजाबाद मंडल के अधीक्षण अभियंता को जिम्मेदारी दी है।
13 साल बाद भी अधूरा है सीवर निर्माण
बलिया। शहर में वर्ष 2006-07 में कुल 97.22 करोड़ की लागत से बनने वाले सीवर व एसटीपी विभागीय अधिकारियों की सुस्ती व भ्रष्टाचार के कारण 13 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। सीवर निर्माण के लिए शहर को दो भागों में बांटा गया। सिटी जोन की लागत जहां 52.22 करोड़ थी वहीं सिविल लाइन जोन के लिए कुल लागत 45 करोड़ निर्धारित थी। कुल 97.22 करोड़ में से 12 करोड़ की धनराशि एसटीपी निर्माण के लिए तय की गई थी। शासन से कार्ययोजना स्वीकृत होने के बाद बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया और विभाग ने इस कार्य को मेसर्स ज्योति बिल्डर को ठेका दे दिया। वर्ष 2018 में इस कंपनी ने भी गुजरात की कंपनी ग्रीन लीव को एसटीपी निर्माण की जिम्मेदारी दे दी। एसटीपी शहर से करीब करीब नौ किमी दूर छोड़हर गांव में बन रहा है। इसके लिए पाइप लाइन डाला जा रहा है। शहर के तिखमपुर तिराहे के पास करीब 10 माह से मुख्य मार्ग पर गड्ढा खोदकर पूर्व में डाली गई पाइप को खोजा जा रहा है।
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