वीर लोरिक स्टेडियम को बेहतर बनाने की कवायद लंबे समय से चल रही है। पांच करोड़ की लागत से कई काम भी हुए। पानी निकासी की व्यवस्था के नाली तो बनी लेकिन ऊंची नाली से पानी निकलने के लिए मिट्टी का कार्य नहीं हुआ। इसके चलते हल्की बारिश में भी मैदान पानी-पानी हो जाता है। इससे युवाओं की तैयारी कम से कम तीन से चार दिन बाधित हो जाती है।
ट्रैक से लेकर मैदान तक गीला हो जाता है। मैदान व ट्रैक पर कई जगह पर गड्ढे भी बन गए हैं। मार्च में कुछ मिट्टी का कार्य हुआ लेकिन वह पर्याप्त नहीं हुआ। स्टेडियम के विकास के लिए राज्य सरकार ने लगभग 5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।
कार्यदायी संस्था को कांटेदार बाड़, पुराने जिम परिसर की मैटिंग, स्प्रिंकलर सिस्टम, माइल्ड स्टील के दरवाजे, जिम हॉल के लिए मच्छरदानी, चेंजिंग रूम के साथ प्रवेश द्वार तक संपर्क मार्ग को बनाना था। लगभग तीन साल से अधिक समय में कार्य का पूरा किया गया। कार्यदायी संस्था के कार्य पर सीडीओ ने फरवरी में निरीक्षण के दौरान सवालियां निशान खड़ा किया था। इतनी धनराशि खर्च होने के बाद भी अभी तक मैदान से पानी निकासी की समस्या बनी हुई है। मैदान के पश्चिमी छोर पर नाला बनाया गया लेकिन अभी पूर्ण रूप से पानी नहीं निकल पा रहा है। जिला क्रीड़ाधिकारी जवाहर यादव ने बताया कि पानी निकलने में समय लगता है। मैदान में मिट्टी भराई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।