आर्द्र भूमि के संरक्षण एवं परिवर्तन विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी
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टाउन हाल के बापू भवन में बुधवार को आर्र्द भूमि के संरक्षण एवं परिवर्तन में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें अमेरिका के मौसम वैज्ञानिक सहित पूर्वांचल के नामी-गिरामी वैज्ञानिकों ने अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि अमेरिका में मौसम वैज्ञानिक प्रो. जगदीश शुक्ला ने कहा कि जिले में आर्द्र भूमि के संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना होगा। बीएचयू भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. केएनपी राजू ने कहा कि गंगा बेसिन में आर्द्र भूमि का विस्तृत क्षेत्रफल मौजूद है। जिसके व्यापक संरक्षण एवं परिर्वधन की आवश्यकता है। अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दुबेछपरा के प्राचार्य डा. गणेश पाठक ने कहा कि बलिया में आर्द्र भूमि के विकास में ऐतिहासिक परिस्थितियां है। जिसमें नदियों, नालों और तालों की बहुतायत के कारण इस जनपद में इनका विस्तृत क्षेत्रफल है।\
मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष भूगोल वीमेंस कालेज कलकत्ता मालविका विश्वास राय ने वर्तमान प्ररिप्रेक्ष्य में आर्द्र भूमि पर आने वाले संकट से निपटने के उपाय बताए। कार्यक्रम के संयोजक बीएचयू भूगोल विभाग के शोध छात्र अभिषेक कुमार ने बताया कि बीस वर्षो से सुरहाताल का क्षेत्रफल आधे से भी कम हो गया है तथा पानी की गुणवत्ता में भी कमी आई है। इसके लिए इसकी संरक्षण की आवश्यकता है। कार्यक्रम के सह आयोजक वर्ल्ड विजन के कार्यक्रम प्रबंधक बसंत बाल ने सुरहाताल में अपने संस्था द्वारा किए जा रहे विकास के कार्यो में आने वाली व्यवहारिक कठिनाईयों को बताया।
इस मौके पर मुख्य रुप से डा. शत्रुघ्न पांडेय, डा. गजेंद्र पाल सिंह, डा. चंद्रशेखर उपाध्याय, महेंद्र प्रताप शुक्ल के अलावा कई महाविद्यालयों के प्रोफेसर मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. रामगणेश उपाध्याय तथा संचालन डा. प्रमोद शंकर पांडेय ने किया।