शहीद मंगल पांडेय के गांव नगवां स्थितस्मारक स्थल पर अमृत महोत्सव का उदघाटन करते अतिथि।
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दुबहड़। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव का आगाज शनिवार को 1857 की क्रांति के अग्रदूत शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां से हुआ। इस दौरान वीर शहीदों को नमन किया गया और उनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत प्रचारक सुभाष जी ने भारत माता के चित्र और शहीद मंगल पांडेय जी की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। मंच पर दवनी निवासी अमर शहीद राम सुभग के पौत्र मुन्ना राम और स्वतंत्रता सेनानी रामविचार पांडेय के अलावा शहीद मंगल पांडेय की चौथी पीढ़ी के रघुनाथ पांडेय, शैलेश पांडेय, शेर बलिया चित्तू पांडेय के प्रपौत्र विनय पांडेय, सरदार किशुन सिंह के तृतीय प्रपौत्र सरदार श्रवण सिंह, स्व. रमाशीष सिंह के पुत्र शिवकुमार कौशिकेय, शिव प्रसाद कोईरी की तीसरी पीढ़ी के संजय कुमार मौर्य को प्रांत प्रचारक ने सम्मानित किया। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर चर्चा करते हुए प्रांत प्रचारक ने बताया कि अनेक बलिदानों के बाद देश को 15 अगस्त 1947 को स्वाधीनता के साथ सांस लेने का मौका मिला था। देश की स्वाधीनता संग्राम में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे बलिदानी भी हैं जो गुमनाम हैं। अमृत महोत्सव ऐसे सभी गुमनाम अमर शहीदों को आमजन के बीच तक लेकर जाएगी। अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनानी रामविचार पांडेय और संचालन अरुण मणि द्वारा किया गया। मौके पर विनय, सत्येंद्र, संजय शुक्ल, हरनाम, डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय, दिनेश चंद्र सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह, डॉ. संतोष तिवारी आदि उपस्थित रहे।