बलिया। 2017 की ही तरह विधानसभा चुनाव 2022 में भी पूरे प्रदेश में भाजपा को लेकर लगभग वैसा ही मौहाल रहा। प्रचंड बहुमत से भाजपा की फिर सरकार बनेगी। वहीं, जनपद में चुनावी बयार इसके ठीक विपरीत रही। भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा जहां तीन सीटों का नुकसान झेलना पड़ा, वहीं सपा गठबंधन को मिली धुआंधार जीत ने वर्ष 2012 की लहर की याद दिला दी। हालांकि उस समय प्रदेश में सपा की सरकार बनी थी। इस बार भी सपा ने जनपद में चार सीटें हासिल की है, लेकिन पार्टी प्रदेश की सत्ता से दूर रहेगी। विधानसभा चुनाव-2022 में चली भाजपा की लहर में पूरे प्रदेश में भाजपा गठबंधन को 326 सीटें मिली थीं और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। उस समय भाजपा को जनपद में 37.68 फीसद मत मिले थे और उसके पांच विधायक जनपद से चुने गए थे।
बलिया, बैरिया, सिंकदरपुर, बेल्थरारोड और फेफना विधानसभा में उसे जीत मिली थी। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की लहर पूरे प्रदेश में दिखी और उसे 273 सीटें मिली। इसके विपरीत जनपद में भाजपा के मत प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। 1.25 फीसद कमी के साथ ही उसे 36.39 फीसद मत प्राप्त हुए। नतीजा ये रहा कि भाजपा को पिछले चुनाव की अपेक्षा तीन सीटों का नुकसान झेलना पड़ा और मात्र दो सीटों पर उसे संतोष करना पड़ा। इस बार उसे बलिया नगर और बांसडीह विधानसभा सीट मिली है। वहीं, सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा 8.63 फीसदी मत अधिक हासिल किए। सपा गठबंधन को सीधे तीन सीटों का फायदा हुआ और उसके विधायकों की संख्या बढ़कर चार पहुंच गई।
पिछले विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो सपा को ऐसा फायदा या तो 2012 के विधानसभा चुनाव में हुआ था या 2002 के विधानसभा चुनाव में। विधानसभा चुनाव 2012 में जनपद से सपा पांच विधायक चुने गए थे। प्रदेश में बहुमत के साथ अखिलेश यादव की सरकार बनी थी। वर्ष 2002 में भी सपा ने जनपद में चार विधानसभा सीटें जीती थी, लेकिन प्रदेश में बसपा-भाजपा गठबंधन से मायवती मुख्यमंत्री बनी थी और सपा सत्ता से दूर रही थी। हालांकि ये गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला था और मायावती ने छह माह बाद ही सरकार गिरा दी थी। उस समय बनी परिस्थितियों में लाभ मुलायम सिंह को मिला था और बसपा को तोड़ उन्होंने 2003 में अपनी सरकार बनाई थी। विधानसभा 2022 में भी जनपद में सपा की स्थिति वैसी ही है। उसके चार विधायक चुनाव जीतक आए हैं, लेकिन प्रदेश की स्थितियां विपरीत होने से उन्हें सत्ता से दूर रहना पड़ेगा।