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Ballia News: बाढ़ के बाद 50 गांवों में पेयजल, दवाई और भोजन भी मुश्किल से मिल रहा

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मझौवां/दया छपरा। गंगा नदी का जलस्तर बीते दो दिनों से लगातार घट रहा है। इसके बाद भी बाढ़ से प्रभावित इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। कीचड़ और दुर्गंध से लोगों को दिक्कत हो रही है। बाढ़ के बाद 50 गांवों में पेयजल, दवाई और भोजन के लिए लोगों को मुश्किल हो रही है।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर सोमवार को गंगा का जलस्तर 59.00 मीटर रिकॉर्ड किया गया। खतरे के निशान 57.615 मीटर से अब भी 1.385 मीटर ऊपर जलस्तर है। हालांकि, राहत की बात यह है कि नदी का जलस्तर अब एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है।
बाढ़ प्रभावित गांव शुक्ल छपरा, जग छपरा, सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, वंश गोपाल छपरा, मिश्र के हाता, मुरली छपरा, बुधन चक, बड़का बुधन चक, गुदरी राय के टोला, पाण्डेयपुर, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, उपाध्याय टोला अब कीचड़ सड़न भरी दुर्गंध की मार झेल रहे लोग राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। चक्की नौरंगा के कटान प्रभावित लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। लोग तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं और दाने-दाने को मोहताज हैं।
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उधर, गायघाट से लेकर पचरुखिया तक कई क्षेत्र बाढ़ से जलमग्न है, जिससे हजारों लोग अब भी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं। फसल और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचा है क्योंकि लगभग तीन हजार एकड़ फसल दूसरी बार की आई भीषण बाढ़ में पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। गांवों में खाद्यान्न संकट गहराता जा रहा है। बाढ़ से ग्रस्त दीनानाथ तिवारी, अखिलेश ठाकुर, वीरेंद्र तिवारी, लकड़ी मिश्र ने आरोप लगाया है कि प्रशासन सिर्फ बाढ़ पीड़ितों की सूची तैयार करने की बात कहकर समय टाल रहा है, लेकिन अब तक न तो पर्याप्त राहत सामग्री, न शुद्ध पानी, न ही दवाइयां पीड़ितों तक पहुंच पाई हैं।
बक्सर-कोईलवर बंधे के संपर्क मार्ग तक कटान, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा : चक्की नौरंगा संपर्क मार्ग को कटान से बचाने लिए ग्रामीणों ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है।
श्रमदान शुरू कर मिट्टी से भरी प्लास्टिक की बोरियां गंगा के तेज बहाव में फेंक रहे हैं।
अखिलेश, अभय ठाकुर, विवेक ठाकुर, रामजी ठाकुर, विनोद, मुटुल, धुरुप, दिलीप सहित सैकड़ों ग्रामीणों ईंट-पत्थर नदी में डालकर कटान को रोकने की कोशिश में लगे हुए हैं।
अखिलेश पाण्डेय ने कहा कि सरकार और प्रशासन के भरोसे बैठे रहते तो अब तक संपर्क मार्ग के साथ सड़क के दक्षिण दिशा में स्थित गांव बह चुका होता। कटान पीड़िता निर्मला देवी ने बताया कि हमने बच्चों के स्कूल बैग की बोरियों तक का इस्तेमाल किया, सिर्फ इसलिए की सड़क और गांव बच जाए।
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