बैरिया। स्थानीय तहसील में पिछले दिनों क्षेत्रीय विधायक के पुत्र और रजिस्ट्रार कानूनगो के बीच विवाद की मांग को लेकर तहसीलकर्मियों का धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। हालांकि एसडीएम अशोक चौधरी और प्रभारी तहसीलदार रजत सिंह अपने-अपने कार्यालय में बैठ कर काम किया और आम फरियादियों की समस्याएं दूर कीं। इस दौरान तहसील पहुंचे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने एसडीएम से बात की। कहा, काम पर नहीं आने वालों को अनुपस्थित दर्ज किया जाए।
सांसद ने कहा कि अधिकारी या कर्मचारी जनता के दिए राजस्व से तनख्वाह पाते हैं। यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो एसडीएम व तहसीलदार उन्हें उपस्थिति पंजिका पर गैरहाजिर दिखाएं। तहसील, कलेक्ट्रेट या सार्वजनिक स्थल आंदोलन के लिए नहीं होते। शांतिपूर्ण आंदोलन का हक सबका है, इसलिए कर्मचारी आंदोलन के लिए कोई सुरक्षित स्थान चयनित कर लें। किसी को भी जिले के किसी भी तहसील या कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन व आंदोलन नहीं करने दिया जाएगा। तहसील सभागार में एसडीएम, तहसीलदार और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कार्यक्रम में सांसद ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि हड़ताल समाप्त करें। उनकी सुरक्षा की व्यवस्था और समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू, अमिताभ उपाध्याय, राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, रत्नेश सिंह, आश्वनी ओझा, मंटू बिंद, विजय बहादुर सिंह, चंद्रभूषण सिंह, तेजनारायण मिश्र, रामाशंकर सिंह, सुधांशू तिवारी, दिग्विजय सिंह, विद्या सिंह, डा. दिवाकर तिवारी, दिलीप गुप्ता, पूर्व प्रमुख कन्हैया सिंह, श्याम सुंदर उपाध्याय, राजेश सिंह, कुलदीप सिंह रिंकू मौजूद रहे। इस बीच तहसील में एसडीएम व तहसीलदार के अलावा सभी कार्यालयों पर ताला लटका रहा। सूत्रों की मानें तो कर्मचारी अदालत की शरण ले सकते हैं।
भयभीत हैं तहसील के अधिकारी और कर्मचारी: एसडीएम
तहसील के सभागार में संवाद कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी अशोक चौधरी ने कहा कि जनता के राजस्व से तनख्वाह मिलती है, लेकिन उन्हें काम करने के एवज में पैसे मिलते हैं। सम्मान नहीं बेच सकते। बैरिया तहसील में आये दिन अधिकारियों व कर्मचारियों से मारपीट व गाली गलौज की घटनाओं से तहसील के अधिकारी व कर्मचारी भयभीत हैं। हमें सुरक्षा व सम्मान मिलेगा, तभी हम काम कर पाएंगे। एसडीएम ने पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि तहसील से जुड़े आधा दर्जन मारपीट के मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन उनमें क्या हुआ आज तक पता नहीं चला।