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Ballia News: मौनी अमावस्या पर बन रहा दुर्लभ शिववास योग का संयोग

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बलिया। माघ महीने की माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या बुधवार को है। इस दिन सूर्य देव चंद्रमा के साथ मकर राशि में विराजमान होंगे। वर्ष की सभी अमावस्या में यह एकमात्र विशेष अमावस्या है। मौनी अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास का संयोग मौनी अमावस्या यानी 29 जनवरी को सायं 06: 05 बजे तक है। मौनी अमावस्या पर श्रवण एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव कैलाश पर मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे। इस दिन मकर राशि में एक साथ तीन ग्रह चंद्रमा, सूर्य और बुध मिलकर त्रिवेणी योग बना रहे हैं। ये बातें इंदरपुर थम्हनपुरा गांव निवासी ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने कहीं।
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उन्होंने बताया कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से पाप क्षय होने के साथ आरोग्य में वृद्धि होती है। साथ ही गर्म वस्त्र दान, अन्न दान, पितरों के नाम तर्पण, गुड़, घी, तिल, शहद युक्त खीर गंगा में प्रवाहित करने से पितरों को तृप्ति मिलती हैं। इससे घर में सुख समृद्धि, संतान प्राप्ति और भाग्य का उदय होता है। डॉ.उपाध्याय ने बताया कि भगवान शिव को केसर का दूध चढ़ाने से स्वास्थ्य उत्तम होता है। अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है। इस दिन पंचामृत अभिषेक से आर्थिक संकट से मुक्ति, नाग पूजन से कालसर्प दोष से मुक्ति, संध्याकाल में घृत युक्त लाल धागे से दीपक जलाकर तुलसी पूजन से विकट परिस्थितियों से मुक्ति,घी का दीपक जलाने से यमफंद यानी कि मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। यहां तक कि अकाल मृत्यु तक का योग नष्ट हो जाता है। बताया कि दही, तिल व तामसिक चीजों को खाना इस दिन निषेध है।
कहा कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, सागर मंथन के दौरान अमृत कलश से कुछ बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन में गिरी थीं। इन स्थलों पर स्नान करने से अमृत स्नान का पुण्य प्राप्त होता है, जो भक्त इन पवित्र स्थलों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
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