लालगंज। हर घर नल योजना के तहत सेमरिया ढाले के पास बृहस्पतिवार की भोर में बीएसटी बंधे का 10 फीट हिस्सा बाढ़ का पानी रिसने से कट गया। गंगा नदी के बाढ़ के दबाव से पानी तेजी से बंधे के भीतर घुसने लगा और देखते ही देखते बंधे की मिट्टी ऊपर से नीचे तक बह गई। केवल ढलाई किया गया पिच मार्ग का हिस्सा बचा रहा।
संयोग से एक पेड़ जड़ समेत कटे हिस्से पर जा गिरा, जिससे भारी मात्रा में मिट्टी और पेड़ के कारण पानी का बहाव रुक गया। इससे लालगंज बाजार समेत दर्जनों गांवों की करीब 50 हजार से ज्यादा आबादी संभावित बाढ़ की चपेट में आने से बच गई। भोर में बंधे के टूटने और पानी के तेजी से भीतर आने की सूचना फैलते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने तत्काल बाढ़ विभाग, जलकल विभाग, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।
सूचना मिलने पर लालगंज चौकी प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को खतरे वाले स्थान पर आर-पार जाने से रोकते रहे। बाद में विभाग की ओर से जेसीबी भेजी गई। पेड़ों को काटने का काम शुरू कराया गया और ट्रैक्टर-ट्रालियों से मिट्टी के टुकड़े पहुंचाए गए। कटे हुए हिस्से को बंद किया गया।
घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौजूद कर्मचारियों से जानकारी ली और अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर कटे हुए हिस्से को तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए।
पहले भी आर-पार जा रहा था पानी
ग्रामीणों ने बताया कि इसी स्थान पर पहले भी पानी का रिसाव हो रहा था। इस संबंध में समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद जलकल विभाग ने मिट्टी भरी कुछ बोरियां लगाकर पानी रोकने का प्रयास किया था, लेकिन लोगों का आरोप है कि काम पूरी तरह और स्थायी ढंग से नहीं कराया गया। बृहस्पतिवार की घटना के बाद विभाग के आधे-अधूरे कार्य पर सवाल उठने लगे हैं।
पेड़ नहीं गिरता तो हो सकता था बड़ा नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि कटे हुए हिस्से पर पेड़ जड़ समेत गिरने से पानी का तेज बहाव रुक गया। यदि ऐसा नहीं होता तो लालगंज बाजार और आसपास के दर्जनों गांवों की 50 हजार से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में आ सकती थी। लोगों ने इसे बड़े खतरे के टलने के रूप में देखा।
खतरे को देखते हुए स्कूल बंद कराए गए
बंधे के कटने और पानी के भीतर घुसने के खतरे को देखते हुए लालगंज के आसपास के स्कूलों को भी एहतियातन बंद करा दिया गया। पढ़ने पहुंचे बच्चों को सुरक्षित उनके घर भेज दिया गया, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।