बलिया। भृगु की तपोस्थली पर लगने वाले पशु मेले में रविवार को जर्सी बछिया, दुधारू गाय के साथ ही घोड़े और गधों की खेप पहुंचने से मेले की रौनक बढ़ गई है। फिलहाल मेले में जितनी भीड़ होनी चाहिए नहीं है। नगर पालिका प्रशासन का मानना है कि डाला छठ की वजह से पशु मेले की रौनक फीकी है। छठ पूजा के बाद पशु मेले में एक तरफ जहां घोड़े और गदहों की खरीद-फरोख्त तेज हो जाती है, वहीं भैंस और गाय काफी संख्या में आ जाती हैं।
नंदीग्राम पशु मेले में पशु व्यापारी और पशुपालकाें की सुविधा के लिए मुख्य मार्ग के अलावा दो और रास्ते बनाए गए हैं। लेकिन मेले के अंदर पशुओं के ले जाने के लिए मुख्य मार्ग का ही इस्तेमाल करना होता है। जिससे पशुओं का रजिस्ट्रेशन हो सके। मेले के मध्य में पशुओं की संख्या सबसे कम है। पूर्वी छोर पर गधों और घोड़ों की बाजार धीरे-धीरे सजने लगी है। बैल और बछड़े जहां मेले से कम होते जा रहे हैं,वहीं जर्सी, फ्रिजियन और दोगली नस्ल की गायों की आवक बढ़ रही है। लोकल व्यापारी गंगातीरी गायों की खरीद-फरोख्त में रुचि दिखा रहे हैं।
मेले की शुरूआत में कीमती बैलों की जोड़ी और खूबसूरत बछड़ों से मेले में चार-चांद लग जाता है। पिछले पांच दिनों से बैल और बछड़ों की बिक्री तेजी से चल रही है। हालांकि रविवार को बिक्री काफी कम रही। डाला छठ के कारण मेले में पशुओं के आने की रफ्तार भी थम गई है। मेले में पशु व्यापारियों की प्यास बुझाने के लिए जहां कदम-कदम पर हैंपपंप लगाए गए हैं, वहीं रात चैन से गुजारने के लिए बिजली की समुचित व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं मेले में पशु चोरी की घटना को रोकने के लिए पशु मेले में थाना स्थापित किया गया है। पुलिस और पीएसी के जवानों को मेले की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।