बांसडीह/मनियर। धरती के अमृत में मिलावट व उसकी गुणवत्ता को खोखला करने का क्रम जारी है। इससे दूध का सेवन करने वालों को नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है। इन दिनों बाजारों में बिकने वाले दूध से उसका पौष्टिक तत्व मक्खन निकाल लिया जा रहा है। इससे दूधियों की चांदी कट रही है, लेकिन आम लोगों को सेहत बनाने के नाम पर जेब काटी जा रही है।
सफेद दूध के काले कारोबार ने दूध-दही के शौकीनों का चैन छीन लिया है। मनियर व बांसडीह क्षेत्र में दूधियों की ओर से उसमें मिलावट के साथ ही दूध से मक्खन निकालने का कार्य जारी है। दूधिया पशुपालकों से दूध की खरीददारी कर सीधे मशीन पर पहुंचते हैं और सारे दूध का मक्खन निकालने के बाद ही उसे बेचने के लिए जाते हैं। मक्खन निकाला गया दूध प्रति लीटर 20 रुपये के हिसाब से बाजार में बेच दिया जाता है। क्षेत्र के कुछ पशुपालकों ने बताया कि एक लीटर दूध से 100 ग्राम मक्खन निकलता है। 100 ग्राम मक्खन से 50 ग्राम घी बन जाता है, जो तीन सौ रुपये से 400 रुपये तक प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता है। यही कारण है कि मक्खन निकाले जाते हैं।
पशु पालकों ने बताया कि दूधिए दूध में कुछ पदार्थ भी मिलाते हैं, जिससे उसमें पानी की मिलावट व मक्खन गायब होना आसानी से नहीं पकड़ा जा सकता है। चिकित्साधिकारी डा. उज्ज्वल प्रकाश एवं डा. विनोद कुमार सिंह की मानें तो 40 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए फैट की आवश्यकता होती है। ऐसे में दूध से फैट निकल जाने से उनका शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। जबकि इससे अधिक उम्र के लोगों को फैट की आवश्यकता नहीं होती।