नरहीं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित कंपनी बगान में कई दुर्लभ वनस्पतियां और इनकी खेप जनपद के इर्द-गिर्द दस्तक देने लगी हैं। इनमें कई डालियों वाला चार ताड़ के पेड़ क्षेत्रवासियों के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय बने हुए हंै। इन पेड़ों पर एक नर्सरी के संचालक ने अपना शोध कार्य भी शुरू कर दिया है। इसी नर्सरी में गरम मसाला का पौधा लोगों को घर बैठे ही लजीज व्यंजनों का स्वाद चखाएगा।
स्थानीय नागरिकों को अक्सर लंबा और बिना किसी टहनी के ताड़ का पेड़ दीदार होता रहा है। लेकिन इस व्यवसाय में लगे किसानों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कोलकाता के आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान हावड़ा से कई टहनियों वाली ताड़ की नर्सरी आज बक्सर के चुरामनपुर न्यू माली बाग में किसानों को आमंत्रण दे रही है। नर्सरी संचालक डा. शत्रुघ्न माली ने बताया कि इस पेड़ से दोगुना ताड़ निकाला जा सकेगा। प्रति ताड़ का वृक्ष करीब दो दशक में अपने प्रौढ़ावस्था में आएगा और यहीं से शुरू हो जाएगी किसानों की आमदनी। उन्होंने बताया कि उपरोक्त वृक्ष पर आज शोध कार्य चल रहा है। यदि प्रयोग सफल हुआ तो अन्य ताड़ के पेड़ से दोगुना फल और रस देना निश्चित है। इनके नर्सरी में गरम मसाला (औल एस पाई) नामक पौधा उपलब्ध है। वह अपने घर के आंगन में आसानी के साथ लगाया जा सकता है और घर बैठे ही गरम मसाले का मजा दे सकेगा। नर्सरी संचालक की मानें तो पौधे की पत्ते का प्रयोग किया जाता है। खास बात यह है कि यह सब्जियों में स्वाद और सुगंध गरम मसाले की भांति तो देगा ही, बदहजमी और गैस रोगियों के लिए रामबाण साबित होगा। संचालक का कहना है कि कोलकाता स्थित बगान में चार सौ साल पुराना बरगद का विशाल पेड़ आज भी मौजूद है। उसकी सैकड़ों जड़ें जमीन में मौजूद हैं। यहां हर रोज हजारों, लाखों लोग प्राकृतिक खूबसूरती को बढ़ाते इस पेड़ की दीदार के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।