बलिया। जिले में सालों बाद भी रोजगार सेवकों को सभी तरह के अभिलेख बनाने को पंजिका उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। कई ब्लाकों में इसके लिए रोजगार सेवकों से वसूली किये जाने की भी शिकायत है। उधर, धन जारी होने के बाद भी रोजगार सेवकों के भुगतान में ब्लाकों स्तर से हीलाहवाली जा रही है।
जनपद में वर्ष 2007-08 में मनरेगा योजना की शुरुआत हुई। इसे संचालित करने के लिए सभी 17 ब्लाक के प्रत्येक गांवों में रोजगार सेवकों की नियुक्ति संविदा पर की गई। कुल 833 रोजगार सेवकों की नियुक्ति हुई। नौ सालों में कुछ रोजगार सेवकों की मौत हो चुकी है और कईयों ने नौकरी भी छोड़ दी है। वर्तमान में कुल 687 रोजगार सेवक ही कार्यरत हैं। मनरेगा नियमों के मुताबिक रोजगार सेवकों को कुल छह तरीके के अभिलेख रखने की जिम्मेदारी है। इसमें जॉब कार्ड पंजिका, पंजीकरण पंजिका, संपत्ति पंजिका, मस्टरोल प्राप्ति पंजिका, रोजगार पंजिका व शिकायत पंजिका शामिल है। इसके लिए ग्राम पंचायत या ब्लाक कंटीजेंसी मद से रोजगार सेवकों को पंजिका उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। लेकिन नौ सालों बाद भी अधिकांश रोजगार सेवकों को पंजिका उपलब्ध नहीं कराई गई है। कई ब्लाकों में पंजिका तैयार करने के लिए रोजगार सेवकों से धनराशि की भी मांग की जा रही है और इसको लेकर विवाद भी होने लगे हैं।
ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बब्बन चौधरी ने बताया कि कई ब्लाकों से यह शिकायत मिली है और इस बाबत अधिकारियों को अवगत भी कराया गया है। जिलाधिकारी की ओर से कंटीजेंसी मद से रोजगार सेवकों के लिए जारी मानदेय के भुगतान में ब्लाक स्तरीय अधिकारी हीलाहवाली कर रहे हैं। बतौर उदाहरण दुबहड़ ब्लाक के 39 रोजगार सेवकों के लिए चार लाख 65 हजार 77 की धनराशि जारी की गई लेकिन अब तक खाते में धनराशि नहीं पहुंच सकी है।
कोट
रोजगार सेवकों को कंटीजेंसी मद से ही पंजिका देने का प्रावधान है और इस संबंध में ब्लाकों को भी निर्देश दिया गया है। रोजगार सेवकों से धनराशि लेने के बाबत शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रोजगार सेवकों के वर्ष 2016-17 के मानदेय की धनराशि ब्लाकों को उपलब्ध करा दी गई है, इसमें लापरवाही की शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी।
यूके त्रिपाठी, उपायुक्त, मनरेगा