बलिया। बीएनएस के तहत तीन महीने में विवेचना पूरी करने का नियम है लेकिन विवेचकों की सुस्ती व संसाधन की समस्या से ऐसा हो नहीं पा रहा है।
आजमगढ़ मंडल में करीब 8670 अभियोग लंबित हैं। इनकी जांच समय से पूरी नहीं की जा सकी है। जिसमें आजमगढ़ में 4219, बलिया में 28379 व मऊ में 1578 मुकदमे हैं। इनकी समय से जांच नहीं होने से आरोपियों को सजा नहीं हुई। पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा।
इस वर्ष की शुरूआत में लंबित मामलों की संख्या 1249, बलिया में 958 व मऊ में 377 रही। वहीं, अप्रैल तक आजमगढ़ में 2662, बलिया में 1631 व मऊ में 211 आरोप पत्र दाखिल हुए। आजमगढ़ में 611, बलिया में 352 व मऊ में 210 अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल हो गईं।
निश्चित समय-सीमा के अंदर आजमगढ़ में 956, बलिया में 902 व मऊ में 470 विवेचना लंबित है। तीन महीने से कम लंबित विवेचना की संख्या आजमगढ़ में 805, बलिया में 590 व मऊ में 341 है। सीएम डैस बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार तो तीन महीने से ज्यादा लंबित विवेचनाओं की संख्या में सबसे ज्यादा बलिया में 160, आजमगढ़ में 63 व मऊ में 50 है। लंबित विधिक प्रकरण में मंडल में बलिया को सी ग्रेड मिला है।
एसपी ओमवीर सिंह ने इस महीने की क्राइम बैठक में सभी थाना प्रभारियों को लंबित विवेचना को तय समय के पूरा करने का निर्देश दिया। लापरवाह विवेचकों पर समय-समय पर स्थानांतरण करने की कार्रवाई की जाती है।