रामगढ़। दुबे छपरा में 29 करोड़ रुपये की लागत से बने रिंग बंधे के बचे हिस्से के साथ ही स्पर भी सोमवार की रात गंगा की पानी में बह गया। गंगा की उतरती लहरों से मंगलवार को भी स्पर कटने का सिलसिला जारी रहा। उधर, बाढ़ विभाग के एसडीओ चंद्र मोहन शाही के देखरेख में ईंट के कंकरीट व हरे पेड़ों को काटकर कटान को रोकने का प्रयास भी जारी रहा।
दुबे छपरा बांध के पुनर्निर्माण को बचाया नहीं जा सका और और बचाखुचा हिस्सा के साथ ही स्पर भी सोमवार की रात गंगा की कटान में समाहित हो गया। हालांकि गंगा का जलस्तर बढ़ाव पर नहीं है लेकिन गंगा की उतरती लहरों के कहर को देख ग्रामीण सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी कारणवश गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई तो गांवों को बचाना मुश्किल भरा काम होगा और बड़ी तबाही हो सकती है। रिंग बंधा टूटने की जानकारी पर ग्रामीणों ने दुबे छपरा रिंग बंधा पहुंच बाढ़ विभाग के अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर इस तरह का निर्माण क्यों कराया गया जो हल्की बाढ़ में ही धराशाई हो गया। गोपालपुर के प्रधान मनोज यादव, पंकज तिवारी, स्वामीनाथ तिवारी ने कहा कि साहब ऐसे काम करने से अच्छा है कि उतने पैसे से जमीन खरीदकर सुरक्षित स्थानों पर हम पीड़ितों को बसा दिया जाता, ताकि हम लोग सुकून से तो रहते। जिस पर मौके पर मौजूद अधिकारी बीपी सिंह व एसडीओ चंद्रमोहन शाही ने कहा कि गंगा की लहरों के सामने किसी का बस नहीं चलता।
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दागदारों को ही दी गई थी जिम्मेदारी
रामगढ़। दुबे छपरा रिंग बंधा दो वर्ष में तीन बार टूटने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर कब तक बंधा टूटता रहेगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी। लोगों का आरोप है कि जब दागदारों को ही कार्य की जिम्मेदारी दी जाएगी तो कार्य की गुणवत्ता की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
आंकड़ों पर गौर करें तो डेंजर जोन मझौवां पचरुखिया से लेकर के हुकुम छपरा तक कुल छोटे बड़े 14 स्पर बनाये गए है। जिसमें करीब एक अरब रुपये खर्च हुए थे। मकसद था कि एनएच 31 के साथ ही गंगा के मुहाने पर बसे गांवों को बचाया जा सके। बावजूद न तो एनएच 31 की मुश्किलें कम हुई न गांवों को बचाया जा सका। मझौवां, नारायणपुर, पचरुखिया, हुकुम छपरा, गंगापुर, तेलिया टोला, चौबे छपरा, श्रीनगर तक करीब तीन दर्जन गांवों की जल समाधि हो गई। वर्ष 2013 में आई भीषण बाढ़ में पचरुखिया में बने स्पर 17, 18, 19 व 20 गंगा की लहरों में तत्कालीन डीएम सुनील कुमार श्रीवास्तव के नजरों के सामने बह गया। लेकिन आज तक स्पर क्यों कटा या मानक के विपरीत कार्य कराए गए इसकी जांच नहीं गई। इस कार्य को लेकर जांच की गई होती तो शायद यह नौबत नहीं आती। तत्कालीन जिलाधिकारी मुथुकुमार स्वमी बी ने वर्ष 2016 में हुकुम छपरा में चल रहे कटानरोधी कार्यों का औचक निरीक्षण किया था। जिसमें ठेकेदार व बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता योगेंद्र यादव, मुन्ना यादव व एसडीओ कुमार गौरव पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। सबसे बड़ी बात यह है कि ठेका के फर्म तो बदल गये लेकिन बंधे व स्परों को बनाने वाले वही डमी ठेकेदार रहे। आज भी उन्हीं में से एक अधिकारियों के देखरेख में दूबे छपरा से लेकर के नौबरार में काम करा रहा है।