आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, कई पर कब्जा
निर्माण में हो रहा घटिया सामान का प्रयोग
महीने में भी एक बोरी नसीब नहीं होता पुष्टाहार
अमर उजाला ब्यूरो
बलिया। नौनिहालों को हृष्ट-पुष्ट तथा उनकी प्रारंभिक शिक्षा अर्थात ककहरा को दुरुस्त करने के लिए सरकार द्वारा हर गांव-गांव में आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया है। लेकिन विभागीय उदासीनता और सीडीपीओ की लापरवाही के चलते एक तरफ कई जगह आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं बनाए गए। वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में धांधली की गई है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रामीणों का कब्जा है। गांव के लोगों ने इसकी शिकायतें भी कई बार की। लेकिन इस मामले की जांच करने वाले अधिकारी भी अपनी रिपोर्ट में लीपापोती करते नजर आए। वहीं बहुतेरे गांव में बच्चों का पुष्टाहार पोषाहार बन गया है। इतना ही नहीं एक तरफ बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पुष्टाहार जहां नियिमित तौर नहीं दिए जा रहे हैं। वहीं गर्भवर्ती महिलाओं को साप्ताहित मिलने वाला 250 ग्राम घी भी महीनों से नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम को ठेंगा दिखाया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी सेराज अहमद ने बताया कि सभी केंद्रों के लिए पुष्टाहार भेजा जाता रहा है। अगर कहीं से न बंटने की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलती रही है। इसका निस्तारण जल्द ही कराया जाएगा।
केस: 1
विकासखंड बेलहरी अंतर्गत बजहरा गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में घोर लापरवाही बरती गई है। इसको लेकर शिकायतकर्ता आकाश दूबे मुख्यमंत्री के यहां तक गुहार लगाई। बावजूद सीडीपीओ और विभागीय ठेकेदार की मिलीभगत से एक तो पुरानी नींव पर दीवार खड़ी की जा रही है, वह भी सफेद बालू के साथ । हां शिकायतकर्ता की शिकायत पर सीडीपीओ ने जांच जरूरत किया था तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को पत्र लिखते हुए कार्य में घटिया सामान के प्रयोग की बात बताई थी।
केस: 2
विकासखंड दुबहर गांव की बात करें अखार, ओझवलिया, सीताकुंड में बने आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण घोर लापरवाही बरती गई है। आलम यह है कि इन आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। दीवार पर से पपड़ी छुट रही है। कोई भी सक्षम अधिकारी यदि मौके पर जाकर जायजा ले तो सच्चाई सामने आ जाएगी। लेकिन नीचे से लेकर ऊपर तक की मिलीभगत के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं खासकर अखार तथा ओझवलिया के आंगनबाड़ी केंद्र का आलम यह है कि यहां महीना, महीना पुष्टाहार कार्यकत्रियों को नहीं मिलता है। जिसके गर्भवती तथा बच्चों को पुष्टाहार नसीब नहीं हो रहा है।
केस: 3
चिलकहर विकास खंड अंतर्गत हजौली, असनवार, भरथीपुर, नरांव, मटिहीं आदि गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आलम यह है यहां सप्ताह में नहीं। बल्कि महीने एक ही बार वह भी मात्र दो बोरी ही नसीब होती है। कभी कभार तो दो-दो महीना बीत जाते हैं। फिर भी पुष्टाहार नसीब नहीं होता। कुछ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां नाम न बताने के शर्त पर बताया कि सीडीपीओ कार्यालय से ही पुष्टाहार की बोरी गायब होती है, जो कार्यकत्रियों को मिलता है, उसमें भी सीडीपीओ 2000 की मांग करते हैं।
इनसेट
80 प्रतिशत केंद्र पर नहीं मिल रहा घी
बलिया। जनपद के कुल 2809 आंगनबाड़ी केंद्र है। जिसमें लगभग 80 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र पर आज चार पांच महीने से घी नसीब ही नहीं हो रहा है। जबकि हर गर्भवती महिलाओं के लिए सप्ताह में 250 ग्राम घी देने का प्रावधान है।