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Ballia News: मडुआ की लिट्टी-रोटी खाने से 50 महिलाएं-बच्चे बीमार

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बांसडीहरोड क्षेत्र के छाता चौकन गांव में मडुआ के आटा की लिट्टी खाने में महिलाओं की तबीयत बिगड़न
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बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के आसचौरा, चौकन (छाता) गांव में शुक्रवार की दिन में 11 बजे जिउतिया व्रत की तैयारी के दौरान मडुआ के आटे से बनी लिट्टी-रोटी खाना 50 महिलाओं और बच्चों के लिए मुसीबत बन गया। कुछ ही देर में अलग-अलग घरों में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, मुंह से झाग आना और शरीर में झटके की शिकायत के बाद परिजन पीड़ितों को बांसडीह सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद कई को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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अचानक बड़ी संख्या में पीड़ितों के पहुंचने पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पगली घंटी बजाकर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट किया गया। तीन महिलाएं गंभीर स्थिति में हैं और उनके लिए विशेष टीम लगाई गई है। तीन मरीजों का निजी अस्पताल में भी उपचार चल रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि मरीजों में संदिग्ध पॉइजनिंग के लक्षण मिले हैं, उसी पर इलाज किया जा रहा है।
आसचौरा, चौकन (छाता) गांव में सुबह महिलाओं ने मडुआ के आटे से लिट्टी-रोटी तैयार की थी। गांव निवासी सुशील सिंह ने एक आटा चक्की से मडुआ पिसवाया था। बताया जा रहा है कि इसी आटे को कई लोगों ने लिया था, जबकि गांव के एक दुकानदार ने भी आटा लेकर पुराने आटा में मिलाकर बिक्री की थी।
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आटे से तैयार लिट्टी-रोटी खाने के कुछ देर बाद ही महिलाओं और बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआत में आसचौरा और चौकन-छाता गांव के 10 से 15 लोगों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और शरीर में झटके की शिकायत हुई। इसके बाद परिजन 108 एंबुलेंस और निजी वाहनों से मरीजों को बांसडीह सीएचसी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। करीब एक घंटे के भीतर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 35 से अधिक हो गई।
इमरजेंसी में अलर्ट, छह बेड बढ़े
बांसडीह सीएचसी से 10 से 12 मरीजों के रेफर होने व इमरजेंसी में आने की सूचना पर स्वास्थ्यकर्मी अलर्ट हो गए। कर्मचारियों ने पगली घंटी बजाई, जिसके कुछ देर में ही चिकित्सकों, फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी जुट गए। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके यादव टीम के साथ मरीजों के उपचार और व्यवस्था में जुट गए। इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड के 40 बेड भरने के बाद गैलरी में छह अतिरिक्त बेड लगाए गए। सीएमओ डॉ. अभय नारायण अस्पताल पहुंचे और मरीजों का हाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए।
डीएम-एसपी पहुंचे गांव, आटे की हुई सैंपलिंग
बांसडीह रोड। फूड पॉइजनिंग के पीड़ितों की संख्या बढ़ने की खबर पर डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह जिला अस्पताल पहुंचे और मरीजों की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर इलाज का निर्देश दिया। उसके बाद डीएम, एसपी ओमवीर सिंह दलबल के साथ मरीजों के गांव पहुंचे और ग्रामीणों से जानकारी ली। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने किराना दुकानदार और आटा चक्की से मडुआ के आटे और रोटी लिट्टी के नमूने लिए। नमूनों को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप कर लोगों के सेहत की जांच कर रही है।
इन महिलाओं की हुई तबीयत खराब
अंजू देवी (30), खुशबू (25), सबीता (35), सोमरिया देवी (40), पूनम देवी (45), सरोज देवी (40), फूल कुमारी (50), संध्या (23), दुर्गावती देवी (45), शिवकुमारी (22), पार्वती देवी (28), अंगद (14), चंद्रवती देवी (50), मीरा देवी (45), मानसू देवी (50), उर्मिला (35), गुड़िया (30), धानमुनी (47), गुलशन (12), रोशन (16), शिवम (14), ललिता देवी (42), आर्यन (11), मानती 50, कलावती देवी (47), माकुटी देवी (53), खुशबू (15), संध्या (23) निवासी चौकन (छाता) और पिंकी (25), फूलकली देवी (49), पिंकी (26), पुष्पा (33), शिवम (10), फूलमती (40), देवा (9), सुमन (32), सुनीता (36), माधुरी देवी (42) और रंजिता वर्मा (35) निवासी आसचौरा समेत अन्य शामिल हैं। तीन मरीज तिखमपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए।
एक बेड पर दो-दो मरीजों का हुआ इलाज
मरीजों की संख्या बढ़ने से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में व्यवस्था चरमरा गई। एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती कर इलाज करना पड़ा। चिकित्सकों की टीम ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को तत्काल मेडिकल वार्ड में भेजना शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे तक इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड में अफरातफरी का माहौल रहा। एक मरीज के बेड से हटते ही दूसरे को उस पर लिटाया जा रहा था। भीड़ बढ़ने पर स्टोर से दो अतिरिक्त बेड निकालकर लगाए गए।
नहीं मिला स्ट्रेचर तो गोद में उठाकर इमरजेंसी पहुंचाया
एंबुलेंस और निजी वाहनों से मरीजों के आने का सिलसिला दो घंटे तक चलता रहा। इमरजेंसी कक्ष के आगे स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका। परिजन उन्हें गोद में उठाकर इमरजेंसी कक्ष तक ले गए। स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने हड्डी, सर्जरी और ट्राॅमा सेंटर से स्ट्रेचर मंगाकर लगाए। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों को इमरजेंसी से मेडिकल वार्ड तक पहुंचाने में हुई। वार्ड बॉय मरीजों की देखभाल के बजाय स्ट्रेचर पहुंचाने में व्यस्त रहे। उल्टी से गंदगी फैलने पर सफाईकर्मियों को भी लगातार सफाई करनी पड़ी। पैरामेडिकल छात्रों और निजी सहयोगियों के पहुंचने के बाद कुछ राहत मिली।
गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया कैंप, तीन एंबुलेंस तैनात
बांसडीह रोड। प्रशासन ने गांव में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगातार मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए तीन 108 एंबुलेंस गांव में तैनात की गई है। ग्रामीणों को किसी भी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने को कहा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव निवासी सुशील सिंह ने मड़ुआ छितेश्वर वर्मा की आटा चक्की पर पिसवाया था। बताया जा रहा है कि चक्की संचालक ने भी उसी आटे का कुछ हिस्सा रख लिया था। उसके घर की एक महिला ने इससे बनी लिट्टी खाई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद किराना दुकानदार सोनू वर्मा ने सुशील सिंह से बिक्री के लिए आटा लिया। दुकानदार ने इसे ग्राहकों को बेच दिया। आटा खरीदकर लिट्टी बनाने वाले कई लोगों के बीमार पड़ने की बात सामने आई है। दुकानदार की पत्नी समेत परिवार के तीन सदस्य भी बीमार बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सुशील सिंह ने यही आटा अपने कुछ परिचितों को भी दिया था। उनके घरों में भी लिट्टी खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी।
मडुआ के आटे से करीब 50 महिलाएं-बच्चे बीमार हुए हैं। तीन महिलाएं गंभीर हैं। तीन का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना के कारणों की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम सहित संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर मड़ुआ के आटे और खाद्य सामग्री की जांच कर रही है। लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। -ज्ञानेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी, बलिया।
जांच के बाद होगी विषाक्त की पुष्टि
ईएमओ डॉ. डीपी गुप्ता के अनुसार, मड़ुआ (रागी) का आटा सामान्य तौर पर नुकसानदायक नहीं होता। ज्यादातर व्रत में प्रयोग किया जाता है। जिले में पैदावार काफी कम होने के बावजूद बाजार में यह मिलता है। त्योहार के सीजन में दुकानदार मिलावट करने से बाज नहीं आते हैं। इसमें फाइबर, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं। लेकिन खराब, दूषित या गलत तरीके से रखा गया आटा खाने से बीमारी हो सकती है।
जिला अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि नमी में रखा आटा फफूंद से दूषित हो सकता है। इससे उल्टी, पेट दर्द, चक्कर आदि हो सकते हैं। लंबे समय तक रखा आटा खराब हो सकता है। पिसाई या भंडारण के दौरान मिलावट हो सकती है। यदि अनाज या चक्की में कोई रसायन मिला हो तो तबीयत बिगड़ सकती है। यदि मड़ुआ का अनाज ही किसी दूषित स्रोत से आया हो तो उससे बने आटे का सेवन करने वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं। जांच रिपोर्ट के बिना अभी कुछ कहना ठीक नहीं रहेगा। आटे के साथ-साथ लिट्टी बनाने में इस्तेमाल पानी, तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री की भी जांच जरूरी है।
व्रत के लिए दुकान से मड़ुआ का आटा खरीदकर लाई थी। सुबह परिवार के तीन लोगों ने खाली पेट इसकी लिट्टी खाई। कुछ देर बाद पेट दर्द के साथ उल्टी होने लगी और चक्कर आने लगा। मेरी सास को झटके आने लगे। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। अभी मेरी हालत कुछ ठीक है, लेकिन दो लोगों की हालत खराब है। संध्या देवी, चौकन छाता

सुबह अचानक बहू को उल्टी होने लगी और चक्कर खाकर गिर पड़ी। परिजन उसे बांसडीह स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। धीरे-धीरे गांव की तीन दर्जन से अधिक महिलाओं और प्रसाद खाने वाले बच्चों की तबीयत खराब हो गई। घटना के बाद गांव की महिलाओं में डर बना हुआ है। — तेतरी देवी, चौकन।
पिछले वर्ष का मड़ुआ घर पर रखा था। उसे पिसवाकर कई लोगों को दिया गया था। जिन लोगों ने उसका सेवन किया, उनकी तबीयत खराब हो गई। कुछ लोगों ने दुकान से पिछले वर्ष का मड़ुआ का आटा खरीदकर खाया, उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। मेरी पत्नी और आसपास के कई लोग बीमार हैं। सभी का इलाज चल रहा है। — सुशील सिंह, चौकन।
हमारे मोहल्ले में 10 से अधिक महिलाओं ने दुकान से मड़ुआ का आटा खरीदकर व्रत से पहले उससे बनी लिट्टी खाई थी। इसके बाद सभी की तबीयत खराब हो गई। घटना के बाद मोहल्ले की दूसरी महिलाओं में भी मड़ुआ का आटा खाने को लेकर डर बना हुआ है। — मुनरी देवी, आसचौरा।
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