सड़क किनारे होता सांपों का प्रेमालाप
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बारिश के दिनों जिले में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं की वजह से अस्पतालों में एएसवी एंटी स्नैक वैनम दवा की उपलब्धता अवश्य होनी चाहिए। जिले की आबादी करीब 32 लाख है। जिसमें करीब 70 प्रतिशत आबादी गांवों की है। इतनी आबादी को सांपों के दंश से निजात के लिए जिले में कुल करीब चार सौ एएसवी उपलब्ध है।
जिसमें से जिला अस्पताल में 225 तथा पीएचसी व सीएचसी पर कुल करीब 175 एएसवी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य सरकारी अस्पतालों में पांच-पांच एएसवी भेजी गई थी। आबादी के लिहाज से एएसवी की उपलब्धता ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
सूत्रों की माने तो पिछले साल बरसात के मौसम में जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में एएसवी उपलब्ध नहीं था। जिसके चलते सर्प दंश के शिकार मरीजों को केवल रेफर करने का काम किया गया। इसमें अधिकांश मरीज काल के गाल में समा गए। एएसवी की अनुपलब्धता को लेकर जिला अस्पताल में धरना प्रदर्शन से लेकर आंदोलन तक किया गया।
जिला अस्पताल छोड़कर जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों पर व्यवस्था काफी खराब है। कुछ पीएचसी व सीएचसी पर चिकित्सक व फार्मासिस्ट उपलब्ध ही नहीं रहते, जिसके चलते सर्पदंश के मरीजों को दूर दराज के इलाकों से जिला अस्पताल आना पड़ता है। जिससे काफी देर हो जाती है लिहाजा मरीज को बचाने का प्रतिशत काफी कम हो जाता है।