बलिया। जनपद में एक अप्रैल से दिसंबर 2019 तक समस्त सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में कुल 31177 शिशुओं ने जन्म लिया। इसमें सरकारी में 30681 तथा प्राइवेट में 490 शिशुओं ने जन्म लिया। जिसमें सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में मिलाकर इस नौ माह में कुल 263 शिशुओं की मौत हुई। इसमें सांस व अन्य बीमारियों का कारण बताया जा रही है। जनपद में सिर्फ एक एसएनसीयू है जो महिला अस्पताल में है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के आंकड़े के मुताबिक अप्रैल 2019 में सरकारी अस्पतालों में कुल 1989 शिशुओं ने जन्म लिया। जिसमें 21 शिशुओं की मौत हो गई। मई माह में 2608 शिशुओं ने जन्म लिया तथा 24 की मृत्यु हो गई। इसी प्रकार जून माह में 2774 शिशुओं ने जन्म लिया तथा 26 की शिशुओं की मौत हो गई। वहीं जुलाई माह में 3032 शिशुओं ने जन्म लिया जिसमें 24 की मृत्यु हो गई। जबकि अगस्त माह में 4098 शिशुुओं ने जन्म लिया, इसमें 28 शिशुओं की मौत हो गई। सितंबर माह में 4244 शिशुओं ने जन्म लिया, जिसमें 28 शिशुओं की मौत हो गई। वहीं नवंबर माह में 4009 शिशुओं ने जन्म लिया, इसमें 61 शिशुओं की मृत्यु हो गई। वहीं दिसंबर माह में 3914 शिशुओं ने जन्म लिया, लेकिन मौत का आंकड़ा नहीं मिल पाया। इन शिशुओं की मौत सांस, निमोनिया व अन्य बिमारियों के कारण तथा मृत अवस्था में होना पाया गया।
एक चिकित्सक के भरोसे एसएनसीयू
बलिया। जिला महिला चिकित्सालय में सीक न्योनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) संचालित है। जिसमें 12 बेड है। इसमें चार पद का मानक है, लेकिन एक चिकित्सक ही देखरेख करते है। आलम यह है कि एसएनसीयू में 12 बेड पर दो-दो या तीन-तीन मासूमों का इलाज किया जाता है। इसमें जिला अस्पताल के बजाय बाहर के ज्यादे बच्चे आते हैं। कारण कि महिला चिकित्सालय में नि:शुल्क इलाज है। जबकि नर्सिंगहोमों में 25 से 30 हजार रुपये लगते है।
कोट
जिला महिला चिकित्सालय में कंगारू मदर केयर (केएमसी) वर्ष 2018 से संचालित है। जिसमें 34 हफ्ते से कम के बच्चों का इलाज किया जाता है। लेकिन चिकित्सक व स्टॉफ की कमी से यह शोपीस बना हुुआ है। शिशुओं की मौत कम हो।,इसके लिए विभिन्न प्रकार के टीके लगाए जा रहे हैं और लोगों को टीका लगाने के लिए जागृत भी किया जा रहा है। अस्पतालों के चिकित्सकों को भी इसको लेकर अलर्ट रहने का निर्देश जारी किया गया है।-डा. प्रीतम कुमार मिश्रा, सीएमओ, बलिया।