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Ballia News: 24 थाने, आठ महीने में सिर्फ 11 जीरो एफआईआर

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बलिया। जनपद की सीमा बिहार राज्य व तीन जिलों से लगती है। उसके बावजूद आठ माह में जिले में जीरो एफआईआर की संख्या सिर्फ 11 है, जिसमें तीन जीआरपी थाने की है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है। हालांकि अफसरों का कहना है कि अगर कोई मामला आए तब तो जीरो एफआईआर दर्ज कर केस ट्रांसफर किया जाए। फिलहाल जीरो एफआईआर में सुस्ती पर डीजीपी ने पत्र लिखकर एसपी से लापरवाही न करने का निर्देश दिया है।
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प्रदेश या जिले की सरहदों के विवाद में फरियादियों को अपनी एफआईआर के लिए थाने-थाने चक्कर न लगाना पड़े इसके लिए नए कानून के तहत जीरो एफआईआर का कॉन्सेप्ट बनाया गया है। फरियादी अपनी फरियाद लेकर जिस थाने पर जाएगा वहां की पुलिस उसकी तहरीर पर पहले एफआईआर दर्ज करेगी और उसके बाद सरहद के विवाद को सुलझाएगी और जिस इलाके में घटनास्थल तय होगा उस थाने पर केस ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अगर सरहद का विवाद जिले के अंदर का होगा तो कप्तान के यहां से होकर एफआईआर थाने पर ट्रांसफर किया जाएगा। वहीं रेंज या जोन स्तर का होगा तो क्रमश: डीआईजी, आईजी, एडीजी तथा जोन के बाहर या प्रदेश के बाहर का मामला होगा तो डीजीपी कार्यालय से होते हुए एफआईआर को ट्रांसफर किया जाएगा।

जीरो क्राइम नंबर पर होगा केस, ट्रांसफर के बाद मिलेगा क्राइम नंबर

सीमा विवाद के मामले में उलझे केस को पहले जीरो क्राइम नंबर पर दर्ज किया जाएगा। जब यह तय हो जाएगा कि किस इलाके में यह वारदात हुई है तो उस थाने पर केस ट्रांसफर करने के बाद उसे क्राइम नंबर दिया जाएगा। पहले भी सीमा विवाद में जीरो नंबर पर केस दर्ज किया जाता रहा था लेकिन उसको लेकर कोई लिखित आदेश नहीं था। पर अब बीएनएस कानून के तहत इसे अनिवार्य कर दिया गया है। मकसद साफ है फरियादी को थानों का चक्कर नहीं लगाने दिया जाए वह जिस थाने पर जाए वहां से ही उसे न्याय मिलना शुरू हो जाए।
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कोर्ट की फटकार पर होता है केस दर्ज

ऐसा नहीं है कि जिले के 24 थानों में जीरो एफआईआर के लिए शिकायत नहीं आती है। शिकायतकर्ता शिकायत देते हैं तो जिम्मेदार लिखापढ़ी के चक्कर में शिकायतकर्ता को वापस भेजने के मामले अक्सर देखने को मिलते हैं। थानेदार कोई न कोई खामी निकाल कर जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं। पीड़ित जब कोर्ट गए और वहां प्रार्थना पत्र देकर पुलिस पर केस न दर्ज करने का आरोप लगाया तब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया। पिछले आठ महीने में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं।


जीरो एफआईआर दर्ज करने के लिए सभी थाना प्रभारी को पूर्व से निर्देश दिया गया है। किसी भी फरियादी की शिकायत को नजरअंदाज न करें। अगर जीरो एफआईआर दर्ज न करने की शिकायत मिली तो संबंधित पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कृपाशंकर एएसपी दक्षिणी।
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