बलिया। कभी नक्सली गतिविधि के लिए चर्चा में रहने वाले जिले में अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (पीआईओ) से कनेक्शन की आशंका बढ़ गई है। इस सिलसिले में दो दिन पूर्व लखनऊ की एंटी टेररिस्ट स्क्वाॅड (एटीएस) ने सुखपुरा, दुबहड़ व दोकटी थाना क्षेत्र में छापा मारा। टीम ने पीआईओ के संपर्क में आने वाले तीन संदिग्ध युवकों से पूछताछ की। हालांकि बाद में सभी को छोड़ दिया। टीम जांच के लिए तीनों के मोबाइल फोन ले गई है।
सूत्रों के अनुसार, अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर हमले की साजिश रचने वाले आतंकी अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों अलर्ट हो गई हैं। इसी बीच आजमगढ़ मंडल के कई जिलों के पाक खुफिया एजेंसी से तार जुड़े होने के इनपुट मिलने पर लखनऊ एटीएस ने आजमगढ़, बलिया सहित कई जिलों मेेंं संदिग्धों की तलाश में छापा मारा।
एटीएस ने सुखपुरा थानाक्षेत्र के एक गांव में आतंकी इनपुट मिलने के आधार पर छापा मारा। सादे वेश में छह सदस्यीय टीम मर्चेंट नेवी में कार्यरत एक युवक के घर पहुंची। उसके पाकिस्तानी संपर्क के बारे में पूछताछ की। जांच में कोई सीधा आतंकी कनेक्शन न मिलने के कारण टीम ने संदिग्ध युवक को छोड़ दिया। दुबहड़ व दोकटी थाना क्षेत्र में भी छापा मारा।
जांच के लिए तीनों युवकों का मोबाइल फोन ले लिया। एक युवक के परिजनों के अनुसार, उसने फोन पर पाकिस्तान की खुफिया विभाग की किसी इशिका नामक लड़की से बातचीत की थी। उसे जानकारी नहीं थी कि लड़की पीआईओ की एजेंट है। हालांकि इस बारे में जिला पुलिस ने चुप्पी साध ली है।
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पीआईओ एजेंट इशिका से करता था बातचीत और चैटिंग
सुखपुरा थानाक्षेत्र का निवासी युवक मर्चेंट नेवी में काम करने के दौरान पानी के मालवाहक जहाज में मुंबई से लेकर विदेशों तक का भ्रमण कर चुका है। वह छह माह से गांव में है। वह अक्सर विदेशों से सामान लाने के लिए आता जाता है। इसी दौरान पीआईओ एजेंट से संपर्क हुआ होगा। सूत्रों के अनुसार, इशिका नामक लड़की उससे अक्सर बातचीत करती थी। युवक का मोबाइल नंबर पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़ा था। इसमें अक्सर चैटिंग होती थी। इसकी लगातार एटीएस की टीम मॉनिटरिंग कर रही थी। इसके आधार पर टीम ने छापा मारा। युवक को उस लड़की के पाकिस्तानी की होेने की जानकारी नहीं थी।
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नक्सल इतिहास से जिले का दो दशक पुराना नाता
बलिया। जनपद में नक्सल इतिहास दो दशक पुराना है। नक्सली अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कई वारदात अंजाम दे चुके हैं। वर्ष 2024 में स्वतंत्रता दिवस पर यूपी एटीएस ने बसंतपुर गांव से पांच नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। वे सभी एक झोपड़ी में संगठन की गोपनीय बैठक कर रहे थे। उनके कब्जे से नक्सल साहित्य, पर्चे, हस्तलिखित संदेश, लैपटॉप, मोबाइल फोन, नाइन एमएम की पिस्टल बरामद हुई थी। पूर्व में हुई नक्सली घटनाओं में शामिल नक्सलियों से ये खूंखार माने जाते हैं। यह हमेशा अपने मिशन पर रहते हैं।
एटीएस से नक्सली मामला एनआईए को ट्रांसफर हो गया। इसके बाद एनआईए लखनऊ की तीन सदस्यीय टीम ने 2008 में सोहन सिंह हत्याकांड में शामिल एक लाख के इनामी नक्सली मनोज वर्मा की गिरफ्तारी के लिए दो ठिकानों पर छापा मारा। टीम नक्सली मनोज व संतोष के परिजनों से पूछताछ के बाद टीम मृतक सोहन सिंह के घर पहुंची। सोहन सिंह के भतीजे टूना सिंह से पूछताछ कर लौट गई। सोहन सिंह की हत्या में आठ लोग नामजद किए गए थे, बाद में विवेचना में कुल 18 लोगों के नाम आए। हत्याकांड का मुख्य आरोपी फरार है। वर्ष 2012 में सहतवार थाना क्षेत्र के कुशहर गांव में पुलिस वर्दी में आए नक्सलियों ने कुशहर की प्रधान फूलमती देवी की हत्या कर दी थी। इसमें भी छोटे कहार आरोपी था। प्रधान हत्याकांड में आरोपी पूर्व कोटेदार कृष्ण कुमार की दो वर्ष बाद बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन दोनों नक्सली हमले में शामिल छोटे 15 वर्ष बाद गिरफ्तार हुआ था। वह तेलंगाना में नाम बदलकर रह रहा था।