बलिया। आजादी के बाद प्रदेश में कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस बार 18वीं विधानसभा के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है। इसके लिए सभी दलों के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी भी दमदारी के साथ अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए जुटे हैं। बात अब तक के चुनावों की करें तो 17 चुनाव में मात्र पांच लोग ही अपने दम पर विधानसभा का सफर तय किया है। सबसे ज्यादा दो निर्दलीय विधायक 1969 के चुनाव में चुने गए थे।
प्रत्येक विधानसभा चुनाव में काफी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतरते हैं, लेकिन मतदाताओं की ओर से ध्यान नहीं देने के कारण वो वोटकटवा साबित होकर रह जाते हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या तो प्रत्येक चुनावों में बढ़ जाती है, लेकिन ये लोग अपनी अहमियत साबित करने में पीछे छूट जाते हैं। 1951 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह सेंट्रल से निर्दलीय प्रत्याशी बैजनाथ प्रसाद को जीत मिली थी। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के रंजीत बहादुर को हराया था। इसके अलावा बलिया ईस्ट से निर्दलीय श्रीपत और बलिया नार्थ-ईस्ट कम बांसडीह सीट से नागेश्वर प्रसाद दूसरे स्थान पर थे। 1957 के चुनाव में किसी निर्दलीय प्रत्याशी को जीत तो नहीं मिली, लेकिन दो निर्दलीय प्रत्याशी द्वाबा से सुरेंद्र विक्रम और बांसडीह वेस्ट से बैजनाथ सिंह दूसरे नंबर पर जरूर रहे। 1962 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के रूप में सिर्फ बांसडीह वेस्ट राजाराम दूसरे नंबर तक पहुंच पाए। 1967 में फिर निर्दलियों का खाता खुला। सिकंदरपुर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। आर राम ने जे चौधरी को हराया था। इसके अलावा सीयर से निर्दलीय प्रत्याशी बब्बन और द्वाबा से निर्दलीय प्रत्याशी मैनेजर सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे।
वर्ष 1969 का विधानसभा निर्दलियों के लिहाज से जनपद के इतिहास में सबसे अच्छा रहा। इस चुनाव में जनपद से दो निर्दलीय विधायक चुने गए थे। सीयर विधानसभा सीट से निर्दलीय बब्बन ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के रामाज्ञा को चुनाव में हराया था। द्वाबा विधानसभा सीट से निर्दलीय मैनेजर सिंह ने कांग्रेस के लाल विरेंद्र विक्रम सिंह को हराया था। इसके अलावा बांसडीह विधानसभा से कांग्रेस से बच्चा पाठक के सामने निर्दलीय विजय बहादुर दूसरे नंबर पर थे। इसके बाद निर्दलियों की साख में फिर गिरावट देखी गई। 1974 के चुनाव में मात्र एक निर्दलीय प्रत्याशी सिकंदरपुर विधानसभा से नरेंद्र बहादुर दूसरे स्थान पर रहे। 1977 के चुनाव में भी मात्र एक निर्दलीय प्रत्याशी सीयर से बब्बन दूसरे स्थान पर रहे। 1980 और 85 के चुनाव में किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपनी दमदार उपस्थिति नहीं दर्ज कराई। 89 में भी निर्दलीय की स्थिति कमजोर रही। सिर्फ द्वाबा सीट से विक्रम सिंह दूसरे स्थान पर रहे। 1991 और 1993 भी जनपद निर्दलियों के लिए खाली रहा। 1996 में बलिया नगर सीट से मंजू सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सपा के विक्रमादित्य पांडेय को हराया था। इसके बाद से 2002, 2007 और 2012 में जनपद की विधानसभा सीटों पर निर्दलीय कुछ खास दम नहीं दिखा सके। 2017 के विधानसभा में बांसडीह विधानसभा सीट से निर्दलीय केतकी सिंह ने सपा के रामगोविंद चौधरी को कड़ी टक्कर दी थी। इस बार वो भाजपा प्रत्याशी के रूप में राम गोविंद को टक्कर दे रही है।
कब कौन निर्दलीय ने जीता चुनाव
वर्ष-विधानसभा-जीते-हारे
1951-बांसडीह सेंट्रल-बैजनाथ प्रसाद- रंजीत बहादुर (सोशलिस्ट पार्टी)
1967-सिकंदरपुर-आर राम-जे चौधरी-(कांग्रेस:
1969-सीयर-बब्बन-रामाज्ञा (सोशलिस्ट पार्टी)
1969-द्वाबा-मैनेजर सिंह-लाल विरेंद्र विक्रम सिंह (कांग्रेस)
1996-मंजू सिंह-विक्रमादित्य पांडेय (सपा)