बलिया। जिले में बिजली आपूर्र्ति की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक अंधाधुंध कटौती बदस्तूर जारी है। कई इलाकों में तो महत पांच से छह घंटे तक की ही आपूर्ति हो रही है।
तीन माह पहले प्रदेश में बनी योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति को लेकर सख्त कदम उठाए थे। सरकार ने जिला मुख्यालय को 24, तहसील मुख्यालयों को 20 और ग्रामीण इलाकों के लिए 18 घंटे आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित किया। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी लोगों को रोस्टर के अनुसार बिजली की आपूर्ति नहीं मिल सकी है। हालांकि शुरुआत में तो आपूर्ति कुछ ठीक रही लेकिन ज्यों-ज्यों समय बीतते गए त्यों-त्यों आपूर्ति की हालत बदतर होती गई।
आलम यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। कटौती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री व जिले के प्रभारी बुधवार को जनपद में थे, इसके बावजूद शहर में कटौती और बार-बार ट्रिपिंग का सिलसिला जारी रहा। पिछले दो दिनों से तो आपूर्ति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। ईद के दिन जहां शहर में बार-बार कटौती होती रही वहीं जनपद के दर्जनों गांव अंधेरे में रहे। मंगलवार को भी सोहांव ब्लाक के तीन दर्जन गांवों में पूरे दिन बिजली गायब रही और शाम पांच बजे आपूर्ति मिली लेकिन दो घंटे बाद फिर गायब हुई तो पूरी रात नहीं लौटी। शहर के चौक, आर्यसमाज रोड, शास्त्री नगर, बड़ा गड़हा, बनकटा, एलआईसी रोड, मालगोदाम रोड आदि मुहल्लों में रात में होने वाली कटौती पर लगाम नहीं लग सका है। आलम यह है कि शहर में जहां 15-16 घंटे आपूर्ति मिल पा रही है वहीं ग्रामीण इलाकों में पांच-छह घंटे ही बिजली मिल रही है। यह तब हालत है जब जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के जिम्मे है और फेफना विधानसभा क्षेत्र के विधायक राज्यमंत्री हैं।
बिजली चोरी रोकने के नाम अधिकारी-कर्मचारी कर रहे ‘खेल’
बलिया। शासन की ओर से बिजली की चोरी रोकने के कड़े निर्देश दिए गए हैं लेकिन इसकी आड़ में विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ‘खेल’ करना शुरु कर दिया है। बताया जाता है कि जिले में विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक बिजली चोरी का जाल बिछा है। जांच के नाम पर अधिकारी केवल कोरम ही पूरा करते हैं। सूत्रों की मानें तो शहर में बिजली कर्मियों की मिलीभगत से दर्जनों घरों व दुकानों में एअर कंडीशन चलाए जाते हैं। इसके अलावा चोरी की बिजली से छोटे उद्योग का भी संचालन किया जाता है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में भी कर्मचारियों की मिलीभगत से बिजली चोरी की जाती है। जब कभी बाहरी दल जांच को पहुंचते हैं तो यह कर्मचारी संबंधित लोगों को आगाह भी कर देते हैं। कोरम के लिए अधिकारी गरीब किसानों को निशाना बनाते ह्रैं।
छह से आठ घंटे की ही हो रही सप्लाई
चितबड़ागांव। नगर पंचायत सहित आसपास के ग्रामीण इलाको में विद्युत आपूर्ति की स्थिति पिछले चार दिनों से चरमराई है। निर्धारित रोस्टर 18 घंटे के सापेक्ष महज छह से आठ ही बिजली मिल रही है। यह आपूर्ति लगातार नहीं मिलती और आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है।
रात के 12 घंटे में महज साढ़े तीन घंटे हुई आपूर्ति
रेवती। ईद की रात से ही बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ध्वस्त है। ग्रामीण इलाके में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का सरकारी दावा फिलहाल फ्लॉप है। स्थानीय सब स्टेशन के डेलि लाग शीट पर अंकित बिजली आपूर्ति व कटौती ही बताने के लिए काफी है। इसके 26 जून की शाम 5.10 पर कटी बिजली 7.00 बजे लौटी पुन: 7.50 पर गुल हुई तो 10 बजे रात को आई। फिर 11.25 पर जाने के बाद12.25 बजे लौटी और 2.25 बजे रात को जो गई तो 27 जून को सुबह 5 बजे आई। इस रात 12 घंटे में साढ़े तीन घंटे ही बिजली रही।
10 घंटे भी लगातार नहीं मिलती बिजली
सुखपुरा। क्षेत्र में सरकार की ओर से 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित है लेकिन 10 घंटे की आपूर्ति भी लगातार नहीं मिलती है। कस्बा में स्थित विद्युत उपकेन्द्र से आए दिन बिजली की आपूर्ति बाधित रहती है। जर्जर पोल और तार के कारण भी आपूर्ति प्रभावित होती है।
10-12 घंटे की आपूर्ति में भी बार-बार कटौती
बेल्थरारोड। नगर क्षेत्र में विद्युत की आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीण क्षेत्र में 18 व नगर क्षेत्र में 20 घंटे आपूर्ति की घोषणा सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। रोस्टर के मुताबिक सुबह नौ बजे से शाम छह बजे और रात्रि आठ से सुबह 6 बजे तक आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित है लेकिन 10-12 घंटे से अधिक आपूर्ति नहीं मिल रही है। इसके अलावा आपूर्ति के दौरान तार टूटने या अन्य कारणों से भी आपूर्ति हमेशा बाधित होती रहती है।
6-7 घंटे की हो रही आपूर्ति
हनुमानगंज। विद्युत विभाग की ओर से निर्धारित 18 घंटे आपूर्ति के सापेक्ष क्षेत्र में मुश्किल से छह से सात घंटे की सप्लाई मिल रही है। बिजली विभाग की लापरवाही के चलते आए दिन जर्जर तार जगह-जगह टूटतें हैं और सप्लाई ठप हो जाती है। ग्रामीणों की ओर से कई बार इसकी शिकायत विभाग से लेकर डीएम तक की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।