बलिया। चकबंदी न्यायालयों में कुल 4760 वाद लंबित हैं जिनमें 2403 मामले पांच साल पुराने हैं। चकबंदी के वादों के लंबित रहने का कारण अधिकारियों की कमी बताई जा रही है।
शासन ने राजस्व विभाग के न्यायालयों में पांच साल से अधिक पुराने वादों को वरीयता के आधार पर निस्तारित करने का निर्देश दिया है लेकिन इसके बाद भी पुराने वादों के निस्तारण में तेजी नहीं आ रही है। जिले में चकबंदी के सात न्यायालय हैं। इसमें बंदोबस्त अधिकारी, उपसंचालक के अलावा पांच चकबंदी अधिकारी न्यायालय हैं। इन न्यायालयों में मार्च 19 तक कुल 5013 वाद लंबित थे जिसमें पांच साल से पुराने वादों की संख्या 2656 थी। वर्तमान में 4760 वाद लंबित हैं जिनमें पांच साल पुराने बाद 2403 वाद हैं। बताया जाता है कि इसके बाद चुनावी कार्य के कारण सुचारु रुप से न्यायालयों का संचालन नहीं हो सका जिसके कारण वादों के निस्तारण की गति धीमी रही। विभागीय अधिकारी की मानें तो अधिकारियों की कमी होने के कारण भी वादों का निस्तारण प्रभावित होता है। बंदोबस्त अधिकारी ने बताया कि जिले में बंदोबस्त अधिकारी के दो पदों के सापेक्ष एक व उप संचालक चकबंदी के दो पदों के सापेक्ष एक अधिकारी ही कार्यरत हैं।
बंदोबस्त अधिकारी धनराज यादव ने बताया कि पांच साल से पुराने वादों का निस्तारण वरीयता के आधार पर किया जाता है। अधिकारियों की कमी के कारण भी निस्तारण की गति प्रभावित होती है। जल्द ही पुराने मामलों का निस्तारण कर दिया जाएगा।