बलिया। लॉकडाउन के तीसरे चरण के अंतिम दिन यानि रविवार को 57 बसों से 1525 प्रवासी श्रमिक जिले में आए। इन कामगारों में पड़ोसी राज्य बिहार के अलावा देवरिया, मऊ, गाजीपुर के लोग शामिल रहे। कामगारों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। रोडवेज परिसर में तैनात मोबाइल मेडिकल यूनिट के चिकित्सकों ने थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी को होम क्वारंटीन किया गया। गैर जनपदों और बिहार के प्रवासी कामगारों को रोडवेज की बसों से उनके गन्त्वय को रवाना किया गया।
प्रदेश के बहराइच, बलरामपुर, लखनऊ, सिदार्थनगर, मिर्जापुर, रायबरेली, लखनऊ, एटा, शाहगंज, गोंडा, उरई, कन्नौज, बस्ती, मेरठ, इटावा, अमेठी, गाजियाबाद, सुल्तानपुर आदि जिलों से रोडवेज की 57 बसों से करीब 1525 प्रवासी मजदूर पहुंचे, जिनमें करीब 41 श्रमिक बिहार प्रांत के विभिन्न जिलों के रहने वाले थे। इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व कोविड-19 के नोडल अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि जो श्रमिक पहले से क्वारंटीन होकर आए थे, उनकी रैडम सैपलिंग कराकर उन्हें होम क्वारंटीन कराया जा रहा है।
मॉस्क, ग्लब्स और टोपी को खुले में फेंक दिया गया है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। जबकि इस संबध में जिम्मेदार यह कह रहे कि जांच में जुटी टीम को प्रयोग किए गए मॉस्क ,ग्लब्स और सामग्री के डिस्ट्राय का बकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। लेकिन रविवार को उसके दावे की पोल उस वक्त खुली दिखी जब रोडवेज बस अड्डा परिसर के मुख्य भवन के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों के समीप खुले में प्रयोग किए गए मॉस्क, ग्लब्स और टोपी फेंकी दिखी।
-