नौरंगा में गांव में कटान के दाैरान गंगा नदी के किनारे खड़े लोग। स्रोत: जागरुक पाठक
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मझौवां/दया छपरा। गंगा नदी का जलस्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ने से 35 से अधिक गांवों के लोग भयभीत हैं। दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। चक्की नौरंगा में 15 एकड़ कृषि भूमि नदी में विलीन हो गई। 12 घंटे के अंदर सुघर छपरा, उदयी छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला, टेंगरही तक लगभग 35 गांवों की 45 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका है। नौरंगा के प्रधान सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि बृहस्पतिवार रात को छह से अधिक किसानों की भूमि गंगा में समा गई। शंकर भगवान का मंदिर भी नदी ने समा गया। सबसे भयावह स्थिति सुघर छपरा गांव की है। वहां अफरातफरी है। दूबे छपरा हनुमान मंदिर पर बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में चल रही है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक गंगा नदी का जलस्तर शुक्रवार की शाम 4 बजे 58.590 मीटर दर्ज किया गया। दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव है। मध्यम बाढ़ स्तर से 25 सेमी नीचे है जो शनिवार की सुबह तक पार करने की संभावना है।
खासतौर पर चक्की नौरंगा और भुआल के गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। एनएच-31 के दक्षिण दिशा में गायघाट से लेकर टेंगरही बिड़ला बांध से भुआल छपरा चक्की नौरंगा तक 1500 एकड़ फसल दो सप्ताह पहले आई बाढ़ में डूब गई थी। गंगा नदी मीडियम फ्लड लेवल से चंद सेमी नीचे है।
चक्की नौरंगा में गांव में जाने वाली सड़कों पर नदी के बाढ़ का पानी भर जाने से ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया है। पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर ने बताया कि चक्की नौरंगा में आरसीसी रोड को ध्वस्त करने के बाद निर्माणाधीन शिव मन्दिर को बृहस्पतिवार की रात 11 बजे गंगा नदी अपनी आगोश में समाहित कर लिया। भुआल छपरा यादव बस्ती में गंगा का पानी प्रवेश कर चुका है। तीन तरफ से घिरे इन गांवों के सड़क मार्ग पर बाढ़ का पानी घुटने तक भर जाने से गांव वाले अपने दैनिक उपयोग के खाद्य सामग्री भी नहीं जुटा पा रहे हैं।