बलिया। बरसात में दूषित पानी से बीमारियां फैलती हैं। इसके बावजूद ओवरहेड टैंकों की सफाई में कोताही बरती जाती है और लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। नगर में वाटर सप्लाई की जिम्मेदारी संबंधित नगरपालिका या नगर पंचायतों के जिम्मे होती है और ग्रामीण इलाकों की टंकियों को प्रधानों के हवाले कर दिया गया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक की टंकियों की साफ-सफाई में कोताही की जाती है, हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि टंकियों की नियमित सफाई व डोजर चलते हैं।
जिले में कुल 106 नलकूपों का संचालन किया जाता है। इसमें नगरीय इलाकों में दो दर्जन नलकूपों का संचालन किया जाता है। पिछले कई सालों से शहर में ही टंकियों से पीले पानी की सप्लाई होती है। इसको लेकर कई बार शहरवासियों की ओर से नगरपालिका के अधिकारियों से शिकायत भी की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। आलम यह है कि शहर के अमीर हो या गरीब सभी पीने के लिए बोतल बंद पानी का इंतजाम करने को मजबूर हैं। टंकियों में कभी कभार ही क्लोरीन का प्रयोग किया जाता है। जबकि जल निगम के अधिकारियों का दावा है कि प्रत्येक नलकूपों के पम्प के पास डोजर लगाए हैं जिसके माध्यम से हमेशा पानी में क्लोरीन की मात्रा पहुंचती है।
विभागीय अधिशासी अभियंता ने बताया कि डोजर में दवा की उपलब्ध बनाए रखने का निर्देश दिया गया है और डिमांड होते ही दवा उपलब्ध भी करा दी जाती है। उन्होंने बताया कि पहले टंकियों को सूखाकर सफाई की जाती थी और उसमें ब्लिचिंग पाउडर डाला जाता था। लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है और प्रत्येक नलकूप के पम्प के पास डोजर लगा दिया गया है ताकि दूषित पानी की सप्लाई नहीं हो सके।
पानी टंकियों के संचालन को लेकर पूरी तैयारी की गई है। टंकियों के नलकूप में लगे डोजर में हमेशा दवा की उपलब्धता रहती है। समय-समय पर टंकियों की साफ-सफाई भी कराई जाती है। ओटी टेस्ट के लिए विभाग की ओर से आधा दर्जन टीमें गठित की गई हैं।
= कयाम हुसैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम, बलिया