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121 बड़ी परियोजनाओं की थमी रफ्तार

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बलिया। विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में कोई नया काम नहीं शुरू हो सकता, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, वे चल सकती हैं। चुनाव के बहाने इनके कार्य भी कुछ सुस्त पड़ गए हैं। जिले में छोटी-बड़ी 150 से अधिक परियोजनाएं संचालित हैं। इसमें 50 लाख से अधिक की कुल 128 परियोजनाएं संचालित हैं। अब तक महज सात परियोजनाएं ही पूरी हो सकी है। इसमें सबसे अधिक जल निगम विभाग की 63 परियोजनाएं हैं। इसके अलावा अलग-अलग विभागों के अधिकांश परियोजनाएं आधी-अधूरी पड़ी हैं। कई परियोजनाएं तो एक से डेढ़ दशक से चल रही हैं और यह कब पूरी होंगी कोई समय सीमा नहीं है। इन परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए समय-समय पर उच्चाधिकारियों की ओर से समीक्षा भी की जाती है।
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जिले में 50 लाख से अधिक लागत की अलग-अलग विभागों के 11 कार्यदायी संस्थाओं द्वारा 985.9205 करोड़ की लागत वाली 128 परियोजनाएं संचालित हैं। इसके सापेक्ष 501.8202 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है। अब तक कुल 389.0580 करोड़ खर्च हो चुके हैं। समय-समय पर अधिकारियों की ओर से इन कार्यों की समीक्षा के बाद कार्य पूरा करने को लेकर निर्देश भी दिए जाते हैं, इसके बावजूद कार्यदायी संस्थाओं पर कोई असर नहीं होता है। अब जब चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो चुकी है तो शेष धन आने का बहाना बनाकर कार्य सुस्त होने की बात कही जा रही है।
लटका लोहिया मार्केट का निर्माण
5 को 8.8120 करोड़ की लागत से बनने वाले लोहिया मार्केट का शिलान्यास हुआ। कार्य कराने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस उप्र जल निगम को दी गई। लेकिन 17 वर्ष बाद भी यह निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस परियोजना के लिए अब तक कुल 4.8200 करोड़ की धनराशि अवमुक्त हुई है और इसके सापेक्ष 4.7910 करोड़ खर्च किया गया है। आलम यह है कि इस परियोजना के पूरा होने की अब समय सीमा धनावंटन पर निर्भर है।
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अधर में पड़ा राजकीय हाईस्कूल
छह वर्ष पहले शासन ने नगरा व गड़वार में एक-एक नवीन राजकीय हाईस्कूल निर्माण के लिए प्रति परियोजना 69.15 लाख की स्वीकृति दी। लेकिन यह दोनों परियोजनाएं आज भी अधर में अटकी हुई हैं। दो स्थानों नगरा ब्लॉक के तुर्की दौलतपुर व गड़वार ब्लॉक के संवरुपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल को उच्चीकृत कर नवीन राजकीय हाईस्कूल बनाने के लिए शासन ने आठ अक्तूबर 2016 को स्वीकृति दी। शासन की ओर से प्रत्येक स्कूल के निर्माण के लिए 69.15 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए कार्य कराने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को दी। लेकिन बीच में कोरोना काल होने के कारण कार्य प्रभावित रहा लिहाजा कार्य पूर्ण कराने की समय सीमा 31 मार्च 2021 की गई। लेकिन इसके बावजूद आज तक कार्य पूरा नहीं हो सका है।
बेकार हो गया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
शहर को गंदगी व नालियों से मुक्ति दिलाने के लिए वर्ष 2005-06 में सीवरेज निर्माण का कार्य शुुरु किया गया जो डेढ़ दशक बाद भी अधर में है। करीब चार वर्ष पहले शहर के विभिन्न मोहल्लों को सीवरेज पाइप से कनेक्ट करने के लिए शहर को अमृत योजना के तहत शामिल किया गया और बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से 40 करोड़ की लागत अप्रैल 2018 में कार्य शुरु कराया गया। लेकिन एसटीपी निर्माण नहीं होने समेत विभिन्न कारणों से सीवर शुरु नहीं हो सका।
दोबारा नहीं शुरू हुआ रिंगबांध का निर्माण
वर्ष 2014 में सरयू से इब्राहिमाबाद नौबरार व सिताबदियारा में किसानों की लगभग 400 एकड़ भूमि और 350 मकान नदी में समा गए थे। वर्ष 2018 से इस इलाके के यूपी-बिहार दोनों सीमा के गांवों को सुरक्षित करने के लिए 125 करोड़ की परियोजना से नया रिग बांध बनाया जा रहा है। बिहार सीमा में 85 करोड़ से चार किमी में रिग बांध कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन यूपी वाले भाग में 3.425 किमी में 40 करोड़ से यह कार्य चार वर्ष में भी पूर्ण नहीं हुआ।
कटान परियोजनाओं लटकीं
कटान को लेकर ज्यादा चर्चा में दूबे छपरा रिग बांध रहा है। यहां पहली बार 27 अगस्त 2016 को यह रिग बंधा टूट गया था। लगभग 40 हजार की आबादी जलमग्न हो गई थी। उसके बाद 29 करोड़ के कटानरोधी कार्य को मंजूरी मिली। कार्य पूरा हुआ लेकिन 16 सितंबर 2019 को रिग बंधा दोबारा टूट गया। उसके अगले दिन 17 सितंबर 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौके पर पहुंचे। आश्वासन दिए कि यहां नदियों की धारा को मोड़ने के लिए काम किया जाएगा। 129 करोड़ से रामगढ़ से ही गंगा की धारा को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए एक साल से ड्रेजिंग कार्य हो रहा है, लेकिन उसकी गति भी धीमी है।
राजकीय महाविद्यालय अधूरा
10 मई 2020 को बैरिया विधायक सुरेन्द्र सिंह ने राजकीय महाविद्यालय का शिलान्यास किया था, तब एक करोड़ रुपये राजकीय निर्माण निगम को निर्माण कार्य शुरू करने के लिए मिला था। इस महाविद्यालय का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 18 माह का समय सीमा निर्धारित किया गया था। दूसरी किस्त जून 2020 में रिलीज किया गया। राजकीय महाविद्यालय निर्माण के लिए कुल 74 लाख 48 हजार रुपये मिला है। निर्माण निगम के अवर अभियंता गोविंद कुमार ने बताया कि शेष धन प्राप्त हुआ तो जून तक राजकीय महाविद्यालय का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
आचार संहिता के कारण नई परियोजनाएं पर काम नहीं होंगे लेकिन संचालित परियोजनाओं के काम नहीं रुकेंगे। परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समय-समय पर कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया जाता है और समय-समय पर कार्यों की मॉनीटरिंग भी की जाती है।
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- प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया।
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