बलिया। जिले में नकलविहीन परीक्षा की कवायद फेल होती नजर आ रही है। हाईस्कूल हिंदी की परीक्षा के दौरान एसटीएएफ ने एक केंद्र के बाहर कापियां लिखी जानी पकड़ी थी। जबकि इस बार केंद्रों पर सीसी टीवी के साथ ही वायस रिकार्डर लगे हैं। और भारीभरकम टीम के साथ परीक्षा की निगरानी की जा रही है। जिले में कुल 234 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें एक राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त 69 व वित्तविहीन 164 विद्यालय हैं। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कुल 27 सेक्टर व छह जोनल मजिस्ट्रेट तैनात हैं। इसके अलावा अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए कुल 24 स्टैटिक मजिस्ट्रेट भी बनाए गए हैं। 20 सदस्यों की कुल छह उड़ाका दल गठित हैं। इसके बावजूद किसी को केंद्र से बाहर कापियां लिखे जाने की भनक तक नहीं लगी। जबकि एसटीएफ की टीम ने छापेमारी कर नकलविहीन परीक्षा की पूरी खोल कर रख दी। टीम ने गड़वार थाना क्षेत्र के हथौड़ी गांव के मोहम्मद मुनीर मुस्लिम इंटर कॉलेज हथौड़ी के 200 मीटर की दूूरी पर मलाही चक स्थित एक घर में शनिवार को सुबह की पाली की परीक्षा के दौरान छापा मारा जहां कापियां लिखी जा रही थीं। टीम ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया। प्रबंधक व एक अन्य युवक भागने में सफल रहे। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। उधर, वर्ष 2018 की परीक्षा के दौरान भी जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी नकलविहीन परीक्षा होने का दावा करते रहे लेकिन 13 फरवरी 2018 को गोरखपुर एसटीएफ ने रसड़ा क्षेत्र के दो कालेजों पर हाईस्कूल गणित की परीक्षा के दौरान छापेमारी कर नकलमाफियाओं के बड़े रैकेट के खुलासा किया था और 10 लोगों को पकड़ा था।
बाहर कापियां खिलने का चलता है खेल,
बलिया। नकलमाफियाओं की पैठ शिक्षा विभाग के जिले से लेकर बोर्ड स्तर तक है। इतना ही नहीं वह इस कदर प्रभावशाली हैं कि मनमाने परीक्षा केंद्रों का निर्धारण भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करा लेते हैं। सूत्रों की मानें तो कई ऐसे शिक्षा माफिया भी हैं जो प्रांतीय सीमावर्ती इलाकों में यूपी व बिहार में स्कूल खोले हुए हैं और स्कूलों के बीच की दूरी महज कुछ किलोमीटर ही है। यह माफिया कापियों को बिहार वाले स्कूल में लिखवाते हैं और परीक्षा समाप्त होने से पहले कापियों को जमा करा देते हैं। इन माफियाओं पर हाथ डालने से भी शिक्षा विभाग कतराता है।
घंटो नहीं सामने आती अनुपस्थिति
बलिया। नकलमाफिया व शिक्षा विभाग के बीच सांठगांठ भी समय-समय पर आती है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कोई परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों की उपस्थिति को स्पष्ट करने में शिक्षा विभाग को पांच से सात घंटे लग जाते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी तब तक इस आंकड़े को सामने नहीं लाते जब तक कापियां जमा नहीं हो जाती हैं। सूत्रों की मानें तो इससे नकलमाफियाओं को भरपूर मौका मिलता है। जबकि माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से परीक्षा शुरु होने के 30 मिनट के अंदर छात्रों की अनुपस्थिति ऑनलाइन करने का प्रावधान किया है।